सुमन नगर मे मिट्टी का सौदा,, ऋषि मुनियो की तपो स्थली धरम नगरी बनी खनन नगरी आइये जानते है कैसे,,! हरिद्वार,!
स संपादक शिवाकांत पाठक,,
( बहादराबाद के सुमन नगर में गंग नहर खुदाई के नाम पर अवैध खनन का काला खेल, )
रात में सैकड़ों डंपर, दिन में सरकारी अधिकारी मौन क्यों,,?
किसकी शह पर चल रही मिट्टी माफियाओं की यह लूट कौन देगा जबाब,,,?
तालाब हो या नहर यदि सफाई हो तो समझो कि मामला मिट्टी माफियाओ और ठेकेदारों के गठजोड़ का प्रमाण ही वल्कि सरकारी तंत्र की भी मूक एवम अदृश्य सहमति साफ झलकती है,,
बहादराबाद के सुमन नगर क्षेत्र में गंग नहर की सफाई व खुदाई का सरकारी काम शुरू तो हुआ, लेकिन रात के अंधेरे में यह काम अवैध कमाई की मशीन बन गया है। बीती रात नहर पटरी पर सैकड़ों डंपरों की कतारें साफ दिखाई दीं। ये सफाई मिट्टी माफियाओ के लिए आपदा मे अवसर साबित हुआ,आधिकारिक रूप से "नहर की खुदाई" और असल में “सरकारी मिट्टी की तस्करी" यह धरम नगरी मे आम बात हो गईं है,,- यही खेल खुलकर खेला गया।
सरकारी मिट्टी को माफिया के हवाले कर दिया गया, और करोड़ों की काली कमाई रातों-रात बांट ली गई। सवाल उठता है- इतने बड़े पैमाने की गतिविधि चल रही थी, तो स्थानीय प्रशासन सोया क्यों रहा ? क्या चुप्पी का कारण हिस्सेदारी है या किसी ठेकेदार-अधिकारी गठजोड़ की हरी झंडी नहीं है ?
धामी सरकार की खनन नीति पूरे प्रदेश में सख्त मानी जाती है, मगर सुमन नगर हो या नवोदय नगर,,या फिर रोशनबाद,, आदि में उसी नीति को कुछ, अधिकारियों ने ठेंगा दिखा दिया। जनता अब भड़की हुई है और चेतावनी दे रही है-यदि कार्रवाई नहीं हुई तो जन आंदोलन अवश्य होगा।लेकिन अधिकारियो की बला से,, जो होगा देखा जायेगा क्यों कि कलियुग अब एक धन युग के रूप मे देखा जाने लगा है,, अभी हाल ही मे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री सी एम धामी ने अधिकारियो से कहा की कार्यों की पहचान सदैव रहती है,, लेकिन भाई पहचान से क्या लेना देना पैसा चाहिए,,, पहचान खाने को नहीं देती भाई,,

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें