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प्रिय परिवार के सदस्यों, मित्रों, विद्यार्थियों के माता-पिता और रिश्तेदारों से निवेदन🙏🙏,!

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  स संपादक शिवाकांत पाठक,, हम इस समय जो अनुभव कर रहे हैं, वह सामान्य गर्मी नहीं है। यह “एल नीनो” नामक एक खतरनाक स्थिति का आगमन है। यह चुपचाप जान ले सकता है और हमारे प्रियजनों को हमसे दूर कर सकता है। जैसे-जैसे मई का महीना नजदीक आ रहा है, यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।  “एल नीनो” क्या है? सरल शब्दों में, प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। इससे पूरी दुनिया में हवाओं का प्रवाह बदल जाता है। सामान्यतः मई में वर्षा लाने वाला दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार देर से आ सकता है या कमजोर हो सकता है। यानी जिस समय बारिश होनी चाहिए, उस समय तेज गर्मी पड़ सकती है।  यह स्थिति बहुत खतरनाक है स्वस्थ लोग भी हीट स्ट्रोक के कारण अपनी जान गंवा सकते हैं। इसलिए हमें अपनी सुरक्षा के लिए तुरंत ये सावधानियां अपनानी चाहिए:  प्यास लगने का इंतजार न करें – यह खतरनाक है! प्यास लगना इस बात का संकेत है कि शरीर पहले ही डिहाइड्रेशन का शिकार हो चुका है। हर घंटे पानी पीते रहें। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें कि वे पर्याप्त पानी पी रहे हों। हमेशा अपने पास पानी की बोतल रखें।  स...

संयुक्त टीम की छापेमारी, दबिश देकर घर पर गौमांस बेच रहे 04 दबोचे,!कोतवाली रानीपुर,!

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    स संपादक शिवाकांत पाठक,, पुलिस टीम ने मौके से 300 KG गौमांस व कटान के उपकरण किये बरामद  मौके से फरार एक आरोपी की तलाश में संभावित स्थानों पर पुलिस कर रही है तलाश  ऑपरेशन प्रहार के उत्तराखण्ड गौवंश स्क्वाड, गढवाल परिक्षेत्र व कोतवाली रानीपुर की संयुक्त पुलिस टीम ने आज दिनांक 24.04.2026 की प्रातः मुखबिर की सूचना पर ग्राम दादूपुर गोविन्दपुर स्थित एक घर पर छापेमारी कर 04 आरोपियो  क्रमशः अकरम, अजीम, आदिल व नसरत को दबोचते हुए मौके से मौके से कुल 300 किलो पशु मांस व कटान के उपकरण बरामद किए। मौके से एक आरोपी फरार हो गया जिसकी तलाश की जा रही है। गिरफ्तारी व बरामदगी के आधार पर कोतवाली रानीपुर पर आरोपियों के खिलाफ मु0अ0सं0 131/26 धारा 3/5/11 उत्तराखण्ड गौ वंश संरक्षण अधि0 का अभियोग पंजीकृत किया गया। गिरफ्तार आरोपियो को मा0 न्यायालय में पेश किया जा रहा है।   पकड़े गए आरोपी-👇 1- अकरम पुत्र स्व0 असगर ग्राम दादूपुर सलेमपुर थाना रानीपुर हरिद्वार उम्र-60 वर्ष 2- अजीम पुत्र अकरम ग्राम दादूपुर सलेमपुर थाना रानीपुर हरिद्वार उम्र-22 वर्ष 3- आदिल पुत्र यासीन निवासी ग्राम दा...

कुत्ते भी मुहल्ले के मूल निवासी हैँ उन्हें भगाना या मारना अपराध,!सुप्रीम कोर्ट,!

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  स संपादक शिवाकांत पाठक,  पिछले दिनों कई स्थानों पर आवारा कुत्तों की बर्बरता के बाद इससे छुटकारा पाने की मांग तेज होने लगी है। लेकिन पशु प्रेमियों के लिए अच्छी खबर यह है कि कोई कुत्ता चाहे कितना भी आवारा या कटास (काटने वाला) हो, उसे उसके मोहल्ले या गांव से विस्थापित नहीं किया जा सकता है। वह जहां चाहे रह सकता है या अपनी मर्जी से जा भी सकता है। किसी का जोर-जुल्म नहीं चलेगा। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार केंद्र सरकार ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत पशु (कुत्ता) जन्म नियंत्रण नियमावली को मंगलवार को अधिसूचित कर दिया है। जानवरों पर अत्याचार रोकने के लिए देश में पहली बार 1960 में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम लाया गया था। केंद्र सरकार ने इसी अधिनियम के तहत पशु (कुत्ता) जन्म नियंत्रण नियमावली-2023 को अधिसूचित किया है।

ईश्वर पर अटल विश्वास है तो दुनियां की क़ोई ताकत तुम्हे छू भी नहीं सकती,,!स संपादक शिवाकांत पाठक,,!

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 .                            एक बार प्रह्लादजी नगर विचरण के लिए निकले तो उन्होंने देखा कि एक बूढ़ी कुम्हारिन बहुत रो रही है, वे उसके पास गए और पूछा–‘माई ! वो क्यों रो रही है ?’           उस बूढ़ी माई ने कहा–‘कल उसकी बिल्ली ने एक कच्ची मटकी में दो बच्चे दिए थे, गलती से मैंने वो कच्ची मटकी अन्य कच्ची मटकियों के साथ आवे में रख कर आग लगा दी है, अब भगवान से प्रार्थना कर रही हूँ कि ‘आप ही हो जो उन्हें बचा सकते हो।’            प्रह्लाद जी ने पूछा–‘क्या भगवान् सचमुच उन्हें बचा सकते हैं ?’           बूढ़ी माई बोली–‘अवश्य बचा सकते हैं।’            प्रह्लादजी ने कहा–‘आप आवे को कब खोलेंगी ?’           बूढ़ी माई ने कहा–‘कल।’           प्रहलाद जी बोले–‘आवे को मेरे आने के बाद ही खोलना।’            अगले दिन जब प्रह्लादजी वहाँ आये तो आवा खोला गया...

जब इंटरनेट और मोबाइल नहीं थे तब 452 साल पहले एक संत ने आज जो हो रहा है लिख दिया था,,!

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  स संपादक शिवाकांत पाठक,!  सोचिए, क्या कोई बिना इंटरनेट और बिना किसी आधुनिक मशीन के यह बता सकता है कि आज से सदियों बाद आपकी दुनिया कैसी दिखेगी?  क्या आप जानते हैं कि आज से ठीक 452 साल पहले, जब न बिजली थी, न इंटरनेट और न ही आधुनिक विज्ञान, तब एक संत ने आपके स्मार्टफोन, आज की जहरीली राजनीति और आपके घर के भीतर मरते हुए रिश्तों की पटकथा लिख दी थी?  जब हम आज की भागदौड़, गिरते हुए रिश्तों और बाज़ारों में बिकती शिक्षा को देखते हैं, तो हमें लगता है कि यह सब नया है। लेकिन सच तो यह है कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने 'रामचरितमानस' के पन्नों पर सदियों पहले ही हमारे आज का सच दिखा दिया था।   यह सुनकर रोंगटे खड़े हो सकते हैं, लेकिन गोस्वामी तुलसीदास जी की 'रामचरितमानस' के पन्ने आज हमारे समाज का वह नग्न सच दिखा रहे हैं, जिसे हम 'प्रगति' के पर्दे के पीछे छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। आइए, उन दो चौपाइयों के भीतर झाँकते हैं, जहाँ भविष्य की स्याही से आज का चेहरा उकेरा गया है। उनकी दो चौपाइयां आज महज़ शब्द नहीं, बल्कि हमारे समाज का लाइव टेलीकास्ट हैं।  चौपाई: बरन धर्म नहिं आश्रम चारी।...

ग्राम पंचायत का ठेका, वसूली सिडकुल-PWD जमीन से क्यों — ये कैसा नियम? : पंकज पाल धनगर,!

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  ( पीठ का ठेका बना दैनिक वसूली,,तयबाजारी या लूटबाज़ारी,गरीबो से सौ रूपये रोज ,) रोशनाबाद सलेमपुर ग्राम पंचायत में इन दिनों तहबाजारी के नाम पर जो खेल चल रहा है, उसने पूरे सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आखिर किस नियम के तहत ग्राम पंचायत ने सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र और PWD की जमीन पर ठेका जारी कर दिया? क्या पंचायत की सीमा इतनी बढ़ गई है कि अब दूसरे विभागों की जमीन से भी वसूली होने लगी? सबसे बड़ा सवाल ग्राम प्रधान और जिम्मेदार अधिकारियों से है—जिस जगह का तहबाजारी ठेका दिया गया, क्या वह जमीन वास्तव में ग्राम पंचायत की है भी या नहीं? स्थानीय लोगों के अनुसार जहां वर्षों से बाजार लगता आ रहा है, वह खसरा नंबर 539 सहित अन्य भूमि सिडकुल के नाम दर्ज है, जबकि सड़क किनारे ठेले लगाने वाली जगह PWD के अधिकार क्षेत्र में आती है। ऐसे में वहां से रोज़ाना ₹50 से ₹100 और बाजार के दिन ₹200 तक की वसूली करना सीधा-सीधा नियमों की धज्जियां उड़ाना है। यह वसूली किसी व्यवस्था का हिस्सा नहीं, बल्कि गरीबों की जेब पर डाका है। दिनभर मेहनत कर ₹100–₹200 कमाने वाले ठेले वालों से इस तरह की जबरन वसूली उनके पेट पर लात ...

एक ऐसा हिन्दुओ का गांव जहाँ 700 सालो से नहीं हुआ एक भी अपराध,!स संपादक शिवाकांत पाठक,!

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  इंडोनेशिया में एक गांव है जिसमें 100% आबादी हिंदुओं की है  और इस गांव में पिछले 700 सालों से कोई अपराध नहीं हुआ है  और यह गांव इंडोनेशिया ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे साफ सुथरा गांव माना जाता है अगर कोई कहे कि दुनिया का सबसे साफ-सुथरा हिंदू गांव भारत में नहीं, बल्कि किसी और देश में है, तो पहली नजर में बात अजीब लगती है. लेकिन एशिया के एक छोटे से पहाड़ी गांव ने पूरी दुनिया को दिखा दिया है कि सफाई सिर्फ सरकार का काम नहीं होती, यह आदत बनकर पीढ़ियों तक चलती है. यह कहानी है इंडोनेशिया के बाली में बसे पेंगलिपुरन की, जहां 700 साल से परंपरा भी जिंदा है और सफाई भी आदत जैसी.