इन्सानियत जाति या धर्म की मुहताज नहीं होती मस्जिद मे लोगों ने जुटाये 6 करोड़ 33 लाख,,लेकिन खबर किसी अखबार मे नहीं क्यों,?
( चौकाने वाली बात तो यह है यह खबर किसी भी अखबार की सुर्खियों मे नहीं है क्यों कि इस खबर से दूर तक क़ोई फायदा पत्रकार जगत को होने वाला नहीं है,, बस यही बिडंबना है यही दुर्भाग्य है हमारे देश का,,खनन की खबरें,, अवैध शराब की खबरें तो जरूर देखते होंगे वह भी सीमित समय तक,,,) ( मदद की पहल: एम्स (AIIMS) के पास मदद मांग रही बच्ची की मां को देखकर सोशल मीडिया क्रिएटर सनी और उनके साथियों ने यह पहल शुरू की थी ) अधिकांश लोग संकट में फंसे लोगों के प्रति सहानुभूति तो रखते हैं, लेकिन मदद के लिए पहल करने वाले कुछ ही लोग होते हैं। जब सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर खलीफा और उनके दोस्तों ने दक्षिण दिल्ली के एम्स के बाहर एक परेशान माँ को अपने रोते हुए बच्चे को गोद में लिए देखा, तो उन्होंने मदद करने का फैसला किया। परिवार की मदद करने के एक छोटे से प्रयास के रूप में जो शुरू हुआ, बच्चा स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) टाइप 1 से पीड़ित है, जो एक दुर्लभ आनुवंशिक विकार है जो प्रगतिशील मांसपेशियों की कमजोरी का कारण बनता है। खलीफा और उसके दोस्तों ने सबसे पहले एम्स के बाहर राहगीरों से मदद मांगी। बाद में वे इस अभिय...