बर्षाती मेढक की तरह टर्र टर्र करते नजर आ रहे हैँ चुनावी महारथी ,!हरिद्वार,!
सर्दी गर्मी बरसात की तरह ही एक मौसम भारत में लोकतान्त्रिक व्यवस्था के आधार पर चुनाव का भी आता है,, तरह तरह की नई नई योजनाओं की भीगी भीगी खुश्बू,, जनता की समस्याओ की तरफ अचानक रुझान, लुभावने अंदाज सब कुछ देखने को मिलते है साथ ही कुछ लोग अपने व्यापार से जुड़े आगे बढ़ते लोगों को चुनाव मैदान मे उतरने की सलाह देते हैँ और तारीफ की बात यह है की सलाह कार खुद कभी भी इस चुनावी दल दल में उतरने की भूल नहीं करते,, वे केवल आगे बढ़ते हुए व्यक्ति का तमासा देखने के लिए उसके दिमाग़ में इतनी हवा भर देते है कि वह भूल जाता है कि मेरी क्षमता क्या है और मैं क्या करने जा रहा हूँ,,ऐसा ही एक बाकिया रोशनाबाद क्षेत्र में देखने को मिला एक सामाजिक संगठन के व्यक्ति के दिमाग़ में हवा भर दी गई,,बस फिर क्या था उसने आव देखा न ताव और मुगेरी लॉल की तरह देखने लगा सपने,, बन गया विधायक,, उसकी बोल चाल,, भाषा चलने फिरने के अंदाज ही बदल गया,, तमाम अवसर वादी जो ऐसे अवसरो की तलाश मे रहते है पहुंच गये बहती गंगा मे हाँथ धोने,, बोले आप तो हर समाज हर बिरादरी के मसीहा है,, आप तो शत प्रतिशत जीते हुए हैँ,, बस फिर क्या था हो गया प...