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जब इंटरनेट और मोबाइल नहीं थे तब 452 साल पहले एक संत ने आज जो हो रहा है लिख दिया था,,!

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  स संपादक शिवाकांत पाठक,!  सोचिए, क्या कोई बिना इंटरनेट और बिना किसी आधुनिक मशीन के यह बता सकता है कि आज से सदियों बाद आपकी दुनिया कैसी दिखेगी?  क्या आप जानते हैं कि आज से ठीक 452 साल पहले, जब न बिजली थी, न इंटरनेट और न ही आधुनिक विज्ञान, तब एक संत ने आपके स्मार्टफोन, आज की जहरीली राजनीति और आपके घर के भीतर मरते हुए रिश्तों की पटकथा लिख दी थी?  जब हम आज की भागदौड़, गिरते हुए रिश्तों और बाज़ारों में बिकती शिक्षा को देखते हैं, तो हमें लगता है कि यह सब नया है। लेकिन सच तो यह है कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने 'रामचरितमानस' के पन्नों पर सदियों पहले ही हमारे आज का सच दिखा दिया था।   यह सुनकर रोंगटे खड़े हो सकते हैं, लेकिन गोस्वामी तुलसीदास जी की 'रामचरितमानस' के पन्ने आज हमारे समाज का वह नग्न सच दिखा रहे हैं, जिसे हम 'प्रगति' के पर्दे के पीछे छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। आइए, उन दो चौपाइयों के भीतर झाँकते हैं, जहाँ भविष्य की स्याही से आज का चेहरा उकेरा गया है। उनकी दो चौपाइयां आज महज़ शब्द नहीं, बल्कि हमारे समाज का लाइव टेलीकास्ट हैं।  चौपाई: बरन धर्म नहिं आश्रम चारी।...

ग्राम पंचायत का ठेका, वसूली सिडकुल-PWD जमीन से क्यों — ये कैसा नियम? : पंकज पाल धनगर,!

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  ( पीठ का ठेका बना दैनिक वसूली,,तयबाजारी या लूटबाज़ारी,गरीबो से सौ रूपये रोज ,) रोशनाबाद सलेमपुर ग्राम पंचायत में इन दिनों तहबाजारी के नाम पर जो खेल चल रहा है, उसने पूरे सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आखिर किस नियम के तहत ग्राम पंचायत ने सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र और PWD की जमीन पर ठेका जारी कर दिया? क्या पंचायत की सीमा इतनी बढ़ गई है कि अब दूसरे विभागों की जमीन से भी वसूली होने लगी? सबसे बड़ा सवाल ग्राम प्रधान और जिम्मेदार अधिकारियों से है—जिस जगह का तहबाजारी ठेका दिया गया, क्या वह जमीन वास्तव में ग्राम पंचायत की है भी या नहीं? स्थानीय लोगों के अनुसार जहां वर्षों से बाजार लगता आ रहा है, वह खसरा नंबर 539 सहित अन्य भूमि सिडकुल के नाम दर्ज है, जबकि सड़क किनारे ठेले लगाने वाली जगह PWD के अधिकार क्षेत्र में आती है। ऐसे में वहां से रोज़ाना ₹50 से ₹100 और बाजार के दिन ₹200 तक की वसूली करना सीधा-सीधा नियमों की धज्जियां उड़ाना है। यह वसूली किसी व्यवस्था का हिस्सा नहीं, बल्कि गरीबों की जेब पर डाका है। दिनभर मेहनत कर ₹100–₹200 कमाने वाले ठेले वालों से इस तरह की जबरन वसूली उनके पेट पर लात ...

एक ऐसा हिन्दुओ का गांव जहाँ 700 सालो से नहीं हुआ एक भी अपराध,!स संपादक शिवाकांत पाठक,!

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  इंडोनेशिया में एक गांव है जिसमें 100% आबादी हिंदुओं की है  और इस गांव में पिछले 700 सालों से कोई अपराध नहीं हुआ है  और यह गांव इंडोनेशिया ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे साफ सुथरा गांव माना जाता है अगर कोई कहे कि दुनिया का सबसे साफ-सुथरा हिंदू गांव भारत में नहीं, बल्कि किसी और देश में है, तो पहली नजर में बात अजीब लगती है. लेकिन एशिया के एक छोटे से पहाड़ी गांव ने पूरी दुनिया को दिखा दिया है कि सफाई सिर्फ सरकार का काम नहीं होती, यह आदत बनकर पीढ़ियों तक चलती है. यह कहानी है इंडोनेशिया के बाली में बसे पेंगलिपुरन की, जहां 700 साल से परंपरा भी जिंदा है और सफाई भी आदत जैसी.

दो बसों की आमने सामने टक़्कर मची चीख पुकार,!

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स संपादक शिवाकांत पाठक, हरिद्वार, । श्यामपुर क्षेत्र के रसियाबड़ के पास हाईवे पर मंगलवार शाम दो बसों की आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में 10 से 15 यात्री घायल हो गए, जबकि दो लोग बस में फंस गए थे, जिन्हें पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला। जानकारी के अनुसार, मंगलवार शाम करीब 7:40 बजे डायल 112 के माध्यम से कोतवाली श्यामपुर पुलिस को हादसे की सूचना मिली। बताया गया कि रसियाबड़ के पास एक प्राइवेट बस और रोडवेज बस की आमने-सामने टक्कर हो गई है, जिसमें कई यात्री फंसे हुए हैं। सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष श्यामपुर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। क्षेत्राधिकारी नगर भी घटनास्थल पर पहुंच गए। पुलिस के अनुसार, प्राइवेट बस देहरादून से बारात छोड़कर नागलसोती (बिजनौर) लौट रही थी, जबकि रोडवेज बस बिजनौर से हरिद्वार आ रही थी। इसी दौरान दोनों बसों की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। हादसे में बारात वाली बस के 10-15 यात्री घायल हो गए। पुलिस ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करते हुए बस में फंसे दो यात्रियों को बाहर निकाला और सभी घायलों को 108 एंबुलेंस के जरिए अस्पताल भिजवाया। यात्रियों को दूसरी बसों से उनके...

आज भी इंसाफ जिन्दा है,, न्यायलय सर्वोपरि,9 पुलिस कर्मियों को फांसी,!

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  स संपादक शिवाकांत पाठक,! साल 2020 के चर्चित सथानकुलम कस्टोडियल मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने इस केस में दोषी पाए गए 9 पुलिसकर्मियों को कड़ी सजा दी है। करीब 6 साल तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने इस मामले को बेहद गंभीर और दुर्लभ श्रेणी का अपराध माना। अदालत ने साफ कहा कि यह सत्ता के दुरुपयोग और अमानवीय व्यवहार का स्पष्ट उदाहरण है। यह मामला तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले से जुड़ा है, जहां एक व्यापारी और उनके बेटे की पुलिस हिरासत के दौरान संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। जांच एजेंसी की रिपोर्ट में सामने आया कि दोनों के साथ हिरासत में गंभीर दुर्व्यवहार किया गया था। इस घटना ने देशभर में बड़ा विवाद खड़ा किया था और अब कोर्ट के फैसले को न्याय की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

निजी स्कूलों की खुलेआम लूट पर यू के डी का जोरदार प्रदर्शन,!देहरादून,!

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  स संपादक शिवाकांत पाठक, ( सम्पूर्ण उत्तराखंड निजी स्कूलों की लूट की चपेट में,,,) यूकेडी ने निजी स्कूलों की मनमानी और अनावश्यक फीस वृद्धि, किताबों का बोझ जैसे मुद्दों के साथ बुधवार को कलेक्ट्रेट स्थित जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। यूकेडी कार्यकर्ता डीएम कार्याल के दोनों गेटों से आगे बढ़े। जिस पर यूकेडी कार्यकर्ताओं की सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्युष कुमार के साथ तीखी नोंक झोंक भी हुई। यूकेडी के महानगर अध्यक्ष प्रवीण चंद रमोला के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं का कहना था कि शीघ्र ही नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो रहा है। प्रत्येक वर्ष यह देखा जाता है कि दून के अनेक निजी विद्यालय अभिभावकों पर मनमानी फीस वृद्धि का दबाव बनाते हैं। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों के लिए महंगी एवं अनावश्यक पुस्तकों, कॉपियों, यूनिफॉर्म तथा अन्य शैक्षणिक सामग्री की लंबी सूची जारी कर दी जाती है। कई विद्यालय अभिभावकों को किसी एक निर्धारित दुकान या विक्रेता से ही किताबें, कॉपियां एवं यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य करते हैं, जिससे इन वस्तुओं की कीमत सामान्य बाजार की तुलना में काफी अधिक हो जाती ह...

गौ सेवा या प्रेम सिर्फ नाटक या वास्तविक,,? नवोदय नगर,!

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  शास्त्रीय लेख बताते है की गाय में देवताओं का वास होता है गाय को रोटी खिलाना भारतीय सस्कृति का अभिन्न अंग है,, लेकिन गाय पालना वर्तमान में बेहद कठिन हो गया और जीवन को सीमाओ में सीमित कर हमने ही इसका लाभ दुसरो को देना शुरू किया,, आप सभी जानते है कि एक विशेष समुदाय के लोग पानी,, बिजली,किराये के मकान आदि संकटो से मुक्त पूरी तरह सादा जीवन जीते हुए हमारी अवश्यकताओ कि पूर्ति में एक अहम भूमिका निभाते हुए दुधारू जानवर पालने का व्यवसाय कर अच्छी खासी आमदनी का जरिया बना रखा है,, परिणाम स्वरूप 24 घंटे नवोदय नगर में घूमने वाली लावारिस गायें आप देखते होंगे,, जबकि ये लावारिस नहीं है फिर भी हमारी खामोशी से दर दर भटकने को मजबूर हैँ,, इन्हे पालने वाले कभी इन्हे किसी स्थाई जगह पर बांधते ही नहीं,, क़ोई इन्हे घास चराने भी नहीं जाता,, इनके लिए क़ोई चारा भी नहीं लाता सब कुछ तुम्हारी आस्था पर निर्भर है,, लेकिन गाय मर गई,, बीमार हो गई,, गाय का पैर टूट गया तो गो सेवक अपनी सेवा का झंडा गाड़ने में पीछे नहीं रहते,, जबकि आवारा गौ वंश पर होने वाले हर अत्याचार के लिए समाज दोसी है,, क्यों कि गौ वंश से सिर्फ दूध का फ...