कावड़ की सेवा में दिन-रात: SPO जवानों की बिना थके ड्यूटी,!
*लेखक: स संपादक शिवाकांत पाठक पत्रकार* सावन का महीना आते ही पूरा उत्तर भारत खास कर उत्तराखंड "बोल बम" "बोल बम "के जयकारों से गूंज उठता है। हरिद्वार से गंगाजल लेकर पैदल चलने वाले शिवभक्तों की कावड़ यात्रा सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि सेवा, अनुशासन और समर्पण का महापर्व भी है। इस महापर्व को सफल बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं वो SPO जवान, जो धूप, भीड़ और ट्रैफिक के बीच दिन-रात खड़े होकर ड्यूटी निभाते हैं। कल मैं नवोदय नगर के एक मार्ग से गुजर रहा था। सड़क के किनारे खम्भे के नीचे 5-6 SPO जवान अपनी नीली टी-शर्ट, नीली कैप और गले में ID कार्ड लगाकर तैनात थे। चेहरों पर थकान थी, लेकिन आंखों में जिम्मेदारी का भाव साफ दिख रहा था। किसी के हाथ में डंडा, किसी के गले में सीटी। ट्रैफिक को नियंत्रित करना, कावड़ियों को रास्ता देना, खोए हुए लोगों को उनके साथियों से मिलाना - यही इनकी रोज की दिनचर्या बन गई है। SPO भाईयो से बात हुई। नाम पूछने पर SPO दीपक नौटियाल, मनवर रावत, राम निवास, अमर बौखंडी, मुकेश रावत समाजसेवी दिनेश पाण्डेय बोले "साहब नाम क्या बताएं, ...