यक्ष प्रश्न,,लोकतंत्र, भ्रष्टतंत्र या गुलाम तंत्र,,?
(आज कानून गो से साफ कह दिया मैं ऐसे कोर्ट के आदेशों को नहीं मान सकता,, जब एक तहशीलदार के लिए चकबंदी न्यायलय के आदेशों की अवहेलना क़ोई बड़ी बात नहीं,, तो सोचो आज हमारा देश कहाँ जा रहा है,, हालांकि अदालत की अवमानना आज के दौर मे क़ोई बड़ी बात नहीं,, ) हालाँकि अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के प्रदेश सचिव अनूप भारद्वाज एडवोकेट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार को पहुंचाने का निर्णय लिया है,,, यह एक दम ध्रुव सत्य है कि भारत हजारों वर्षो गुलाम रहा,, और गुलामी से आजाद होने के लिए कुछ चंद वतन परस्त लोंगो ने अपने घर परिवार और अपनी खुद की जिंदगी का मोह त्याग कर दुश्मनो के दांत खट्टे कर दिए,,और देश आजाद होने के बाद एक ऐसे दौराहे पर खड़ा है जहाँ देश की नहीं सिर्फ कुर्सी की चिंता है,, कुर्सी के लिए कितने भी दंगे हों,, भारत की एकता और अखंडता के साथ संप्रभुता को भले की खतरा हो लेकिन राजनीति सिर्फ कुर्सी की होगी, न क़ोई नियम न कानून बस पैसे का बोलबाला,, पैसा फेकों तमाशा देखो,, दाखिल ख़ारिज से लेकर हर वैद्ध कार्य के लिए पैसा देना एक मजबूरी बन गई यानि सिस्टम नाकाम, अपराधियों में भय समाप्त,, क्यो...