यक्ष प्रश्न,,, सवाल क्या हम सचमुच स्वतंत्र हैं,,,? योगी रुपेश ज़ी अयोध्या उत्तर प्रदेश,,,!
स संपादक शिवाकांत पाठक हर वर्ष 15 अगस्त आता है। तिरंगा आकाश में लहराता है, राष्ट्रगान गूँजता है, भाषण होते हैं और हम गर्व से कहते हैं—“हम स्वतंत्र हैं।” लेकिन कभी-कभी उत्सव के शोर से दूर होकर स्वयं से एक असहज प्रश्न पूछना चाहिए— क्या केवल विदेशी शासन से मुक्ति ही स्वतंत्रता है? या स्वतंत्रता का अर्थ इससे कहीं अधिक गहरा है? यदि किसी व्यक्ति के पास तिरंगा तो है, लेकिन पेट भरने का भोजन नहीं; यदि उसके पास मतदान का अधिकार तो है, लेकिन अपने जीवन की बुनियादी आवश्यकताओं के लिए वह दूसरों पर निर्भर है; यदि वह भय, भूख, बेरोजगारी, शोषण, भेदभाव और भ्रष्ट व्यवस्था के दबाव में जी रहा है—तो क्या केवल राजनीतिक स्वतंत्रता उसके जीवन को पूर्ण स्वतंत्रता दे सकती है? मेरे लिए स्वतंत्रता का अर्थ केवल सत्ता का परिवर्तन नहीं, मनुष्य के जीवन का मुक्त होना है। संविधान किसके लिए है—मनुष्य के लिए या मनुष्य संविधान के लिए? संविधान व्यवस्था का उद्देश्य अंततः मनुष्य के जीवन को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वतंत्र बनाना होना चाहिए। कानून और संस्थाएँ मनुष्य के लिए हैं; मनुष्य कानून और संस्थाओं के लिए नहीं। जब व्...