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यू पी के अम्बेडकरनगर में पत्रकार असुरक्षित सामाजिक कार्यक्रम से लौटते समय हुआ जानलेवा हमला, क़ानून है कहाँ,,????।

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  माना कि पत्रकारिता भारतीय संबिधान का चौथा स्थम्भ थी,, लेकिन क्या आज संबिधान आपको साकार रूप मे दिख रहा है,,? पत्रकारों पर हमले स्वतंत्रता पर हमले है भारतीय संबिधान पर हमले है जागो हिंदुस्तान,,,!प्रदेश अध्यक्ष उत्तराखंड स संपादक शिवाकांत पाठक पत्रकार योग कल्याण समिति रजि,.. पत्रकार पर जानलेवा हमला, जातिसूचक गालियां देकर हॉकी-डंडों से पीटा , रुस्तमपुर चौराहे के पास हुई घटना, मुकदमा दर्ज कराने के लिए थाने में दी तहरीर।  संवाददाता आलापुर अम्बेडकरनगर। अम्बेडकरनगर। जिले में पत्रकारों की सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द पर सवाल खड़ा करने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। आलापुर तहसील क्षेत्र के पत्रकार जगदीप गौतम पर बीती रात कथित रूप से कुछ लोगों ने जातिसूचक गालियां देते हुए जानलेवा हमला कर दिया। आरोप है कि हमलावरों ने हॉकी और डंडों से बुरी तरह मारपीट कर उन्हें घायल कर दिया और घटना की जानकारी देने पर जान से मारने की धमकी भी दी।प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम रामकोला निवासी पत्रकार जगदीप गौतम बीते लगभग पाँच वर्षों से क्षेत्र में सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्द...

सावधान,,बृहस्पतिवार को जगन्नाथ मंदिर की ध्वजा पर बैठा बाज अशुभ संकेत,,!स सम्पादक शिवाकांत पाठक,!

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  ओडिशा के पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्नजड़ित नीलचक्र पर लहरा रहे 'पतितपावन बाना' (पवित्र ध्वज) पर गुरुवार को एक बाज(गरुड़) के बैठने की घटना ने करोड़ों श्रद्धालुओं को स्तब्ध कर दिया है। सदियों से चली आ रही इस अटल मान्यता के बीच कि "श्रीमदिर के शिखर के ऊपर से कोई पक्षी नहीं उड़ता", इस दृश्य ने आस्था और आशंकाओं के बीच एक भीषण बहस छेड़ दी है। इसे कोई 'युग परिवर्तन' का संकेत मान रहा है, तो कोई इसे 'महाविनाश' की पूर्व सूचना। भक्तों का एक बड़ा वर्ग इस घटना को सकारात्मक दृष्टि से देख रहा है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, बाज को भगवान विष्णु का वाहन 'गरुड़' माना जाता है। श्रद्धालुओं का कहना है कि कलियुग के बढ़ते प्रभाव के बीच स्वयं गरुड़ देव भगवान जगन्नाथ की रक्षा के लिए नीलचक्र पर विराजमान हुए हैं। पुरी के कई मठों में इसे 'दिव्य सुरक्षा चक्र' के रूप में देखा जा रहा है।  वहीं, भविष्यवाणियों पर शोध करने वालों के बीच आज की यह घटना चिंता का विषय बन गई है। ओडिशा की प्रसिद्ध 'भविष्य मालिका' (संत अच्युतानंद द्वारा रचित) के ...

युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता!स संपादक शिवाकांत पाठक,!

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  युद्ध के पीछे हमेसा कारण होते हैं आकरण युद्ध,, हठधर्मिता कहलाता है,सिर्फ कौतूहाल निर्वित्त के लिए युद्ध जैसी विनाश लीला के घातक परिणाम होते है,, महाभारत हो या राम रावण युद्ध इनके पीछे विशेष कारण थे और युद्ध ही अंतिम विकल्प था जबकि इस समय पर युद्ध सिर्फ शक्ति प्रदर्शन का उदाहरण बना हुआ है,, माया पाय केहि मद नाहीं अर्थात ऐसा क़ोई नहीं है जिसके पास धन, ताकत और बुद्धि अधिक होने पर उसे अभिमान न हो कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है इसराइल और ईरान में यदि युद्ध का माहौल था तो बुद्धिमान देशो को चाहिए की उन्हें कूटनीति द्वारा समझौते की ओर लें जाए न कि अमेरिका की तरह पूछ खड़ी करके खुद भी युद्ध का डंका पीटने लगें, जैसे कुछ बच्चे शैतानी अधिक करते है बस वही क़ाम अमेरिका ने किया उससे पूछो कि क्या ईरान ने तुमको युद्ध की चुनौती दी थी या फिर इजराइल ने मदद के लिए कहा था तो जबाब में नहीं ही उत्तर होगा,, तो फिर अचानक बेचैनी का कारण क्या है,, यदि तुम्हारी गिनती संपन्न देशो में की जाती है तो फिर तुम्हे तो ऐसी वेवकूफी नहीं करना चाहिए कि कल सारी दुनियां हँसे,,क्यों कि फालदार वृक्ष हमेसा झुका होता है नम्र हो ज...

उत्तराखंड क्रांति दल कल अमित शाह को सौपेगा ज्ञापन,!हरिद्वार,!

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  विचार सूचक समाचार, स संपादक शिवाकांत पाठक,, उत्तराखंड क्रांति दल के जिलाध्यक्ष गोकुल सिंह रावत ने बताया कि कल    माननीय गृह मंत्री अमित शाह जी को एक ज्ञापन दिया जाना है जिसके लिए शासन प्रशासन से विन्रम अनुरोध है कि शासन प्रशासन उत्तराखंड क्रांति दल का विज्ञापन देने में सहयोग दें अन्यथा उत्तराखंड क्रांति दल उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होगा जय उत्तराखंड जय उक्रांद,, उत्तराखंड क्रान्तिदल द्वारा मूल निवास एवम भू कानून  को लेकर गृह मंत्री अमित शाह को एक ज्ञापन सौपने का मन बनाया है उन्होने कहा कि अंकिता भंडारी कांड का भी खुलासा निष्पक्ष होना चाहिए ताकि दोसी व्यक्ति आम जनता के समक्ष हो,!

सभासद के प्रयास से नवोदय नगर वासियों ने उठाया छूट का लाभ,!

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  विचार सूचक समाचार,, स संपादक शिवाकांत पाठक,, दीपक नौटियाल सभासद वार्ड नम्बर 13 ने कहा कि सभी जल संस्थान उपभोक्ताओं ने अपने पानी के बिल सामुदायिक केंद्र से कैंप में जाकर जमा किये । मेरे. प्रयासों से विलम्ब शुल्क सभी के लिए मांफ कर दिया गया यह मेरे लिए सौभाग्य का विषय है । सभी ने इसका लाभ लिया श्री नौटियाल ने कहा की वर्षो पूर्व नलकूप के हैंडओवर होने के बाद तमाम उपभोक्ताओं को शिकायत थी की उनका संयोजन विच्छेदन के बाद भी उनके पास बिल आ रहा है और बढ़े हुए बिल की शिकायत थी ,!

भारतीय लोकतंत्र के कैमरे से यू पी पुलिस को नफरत क्यों,!

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  स संपादक शिवाकांत पाठक, उत्तर प्रदेश किधर जा रहा है।मेरठ की डीसीपी सौम्या अग्रवाल महोदया का फरमान सुनकर लगा जैसे थाने में नहीं, किसी गुप्त शोध केंद्र में प्रवेश हो गया हो…जहाँ कैमरा ले जाना राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला हो! थाने को अगर नो कैमरा ज़ोन बनाना ही है, तो बोर्ड भी लगवा दीजिए…यहाँ सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस वाले कैमरे मान्य हैं, सच्चाई दिखाने वाले प्रतिबंधित। अरे मैडम, थाना है… जनता का है… टैक्स से चलता है… कोई सीक्रेट सेट नहीं जहाँ शूटिंग पर पाबंदी हो। अगर पत्रकार वीडियो बना ले तो तुरंत मुकदमा? इतनी फुर्ती तो कई बार असली अपराधियों पर भी नहीं दिखती! जब पुलिस की कार्रवाई अच्छी हो तो कैमरे बुलाए जाते हैं, प्रेस नोट जारी होते हैं, फोटो खिंचवाए जाते हैं। लेकिन अगर कैमरा बिना बुलाए आ जाए, तो वह अचानक कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बन जाता है। डीसीपी सौम्या अग्रवाल जी, लोकतंत्र में कैमरा दुश्मन नहीं होता, आईना होता है और आईने से वही डरता है जिसे अपना चेहरा साफ़ न दिखे। मुकदमे की तलवार लटकाने से साख नहीं बढ़ती, सवालों के जवाब देने से बढ़ती है।

डी एम और एस एस पी हरिद्वार ने पुलिसकर्मियों एंव पुलिस परिवार के साथ हर्षोल्लास से मनाई होली,!हरिद्वार,!

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  स संपादक शिवाकांत पाठक, धार्मिकता ही नहीं वल्कि निरभिमानिता का अनूठा उदाहरण पेश करते हुए जिले के मुखिया ने अपने सेना नायक  नवनीत सिंह ( एस एस पी हरिद्वार ) के साथ होली महा पर्व को मर्यादा की सीमाओ मे रहते हुए हर्षोल्लास पूर्ण ढंग से मनाया,, जैसे प्रभु राम और हनुमान का मिलन जैसे श्री कृष्ण और बलराम का मिलन साधारण नहीं अपितु अलौकिक था ठीक वैसे ही जिसे की सर्वोच्च व्यवस्था को सँभालने वाले जिलाधिकारी  मयूर दीक्षित  अपने सेनानायक से असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक होली महा पर्व पर मिलते हैँ,संयोग वश रमजान के पावन माह और साथ मे रंगों का पर्व होली एक साथ होने के वावजूद जिले में किसी भी प्रकार की अनहोनी की घटना किसी चमत्कार से कम नहीं है,,इस बात को लेकर जनता में  एकखुशी का माहौल देखने को मिला,,तो फिर जिम्मेदारो के लिये एक दूसरे पर रंग लगाकर अपनी सांस्कृतिक  की धरोहर परंपरा को आगे बढ़ाते हुए एक दूसरे के गले मिलकर दी गई शुभकामनाएं भी तो जरुरी थीं,, राम चरित मानस में गो स्वामी तुलसी दास जी महराज लिखते है,, सुनु सुत तोहि उरिन मैं नाहीं। देखेउँ करि बिचार मन माहीं॥"। ल...