तो आखिर रावण को जलाने वाले हैँ कौन,,? इक लख पूत सवा लख नाती, तिह रावन घर दिया न बाती",,!
संपादक शिवाकांत पाठक, ( पिता की आज्ञा को मानकर 14 वर्ष जंगल मे रहने वाले त्यागी, मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने रावण का वध किया था, जलाया नहीं था,,) संत कबीरदास जी की एक प्रसिद्ध वाणी या दोहा है। अर्थ एवं संदेश: • विशाल परिवार और घमंड की नश्वरता:👇 रावण के पास एक लाख पुत्र और सवा लाख नाती-पोते थे, यानी उसका परिवार बहुत बड़ा और शक्तिशाली था। • अंतिम सत्य: 👇अत्यधिक अहंकार, अत्याचारी स्वभाव और अधर्म के कारण युद्ध में रावण और उसके पूरे वंश का ऐसा सर्वनाश हुआ कि उसके कुल में दीया-बाती (श्राद्ध या दीपक) जलाने वाला भी कोई नहीं बचा। • शिक्षा: 👇यह लोकोक्ति / वाणी हमें सिखाती है कि मनुष्य को धन, बल, यौवन या बड़े परिवार का घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि समय और ईश्वर के कोप के आगे सब कुछ क्षणभंगुर है। बड़ा सवाल,, हिन्दू धर्म के अनुसार पिता को चिताअग्नि पुत्र ही देता है,, तो फिर रावण का विनाश यदि उसके वंश के साथ हुआ था तो उसकी चिता को आज कौन जला रहें है आखिर वे हैँ कौन, क्या वे राम हैँ,,? नहीं राम ने तो उसे मारा था जलाया नहीं तो फिर जलाने वाले आखिर कौन है और अपनी पहचान क्यो...