डी एम और एस एस पी हरिद्वार ने पुलिसकर्मियों एंव पुलिस परिवार के साथ हर्षोल्लास से मनाई होली,!हरिद्वार,!
स संपादक शिवाकांत पाठक,
धार्मिकता ही नहीं वल्कि निरभिमानिता का अनूठा उदाहरण पेश करते हुए जिले के मुखिया ने अपने सेना नायक नवनीत सिंह ( एस एस पी हरिद्वार ) के साथ होली महा पर्व को मर्यादा की सीमाओ मे रहते हुए हर्षोल्लास पूर्ण ढंग से मनाया,, जैसे प्रभु राम और हनुमान का मिलन जैसे श्री कृष्ण और बलराम का मिलन साधारण नहीं अपितु अलौकिक था ठीक वैसे ही जिसे की सर्वोच्च व्यवस्था को सँभालने वाले जिलाधिकारी मयूर दीक्षित अपने सेनानायक से असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक होली महा पर्व पर मिलते हैँ,संयोग वश रमजान के पावन माह और साथ मे रंगों का पर्व होली एक साथ होने के वावजूद जिले में किसी भी प्रकार की अनहोनी की घटना किसी चमत्कार से कम नहीं है,,इस बात को लेकर जनता में एकखुशी का माहौल देखने को मिला,,तो फिर जिम्मेदारो के लिये एक दूसरे पर रंग लगाकर अपनी सांस्कृतिक की धरोहर परंपरा को आगे बढ़ाते हुए एक दूसरे के गले मिलकर दी गई शुभकामनाएं भी तो जरुरी थीं,,
राम चरित मानस में गो स्वामी तुलसी दास जी महराज लिखते है,,
सुनु सुत तोहि उरिन मैं नाहीं। देखेउँ करि बिचार मन माहीं॥"। लंका विजय के बाद, भावुक होकर राम ने हनुमानजी से कहा कि मैंने मन में बहुत विचार कर लिया है, पर मैं तुम्हारे उपकारों से कभी उऋण (कर्जमुक्त) नहीं हो सकता।
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