गौ सेवा या प्रेम सिर्फ नाटक या वास्तविक,,? नवोदय नगर,!
शास्त्रीय लेख बताते है की गाय में देवताओं का वास होता है गाय को रोटी खिलाना भारतीय सस्कृति का अभिन्न अंग है,, लेकिन गाय पालना वर्तमान में बेहद कठिन हो गया और जीवन को सीमाओ में सीमित कर हमने ही इसका लाभ दुसरो को देना शुरू किया,, आप सभी जानते है कि एक विशेष समुदाय के लोग पानी,, बिजली,किराये के मकान आदि संकटो से मुक्त पूरी तरह सादा जीवन जीते हुए हमारी अवश्यकताओ कि पूर्ति में एक अहम भूमिका निभाते हुए दुधारू जानवर पालने का व्यवसाय कर अच्छी खासी आमदनी का जरिया बना रखा है,, परिणाम स्वरूप 24 घंटे नवोदय नगर में घूमने वाली लावारिस गायें आप देखते होंगे,, जबकि ये लावारिस नहीं है फिर भी हमारी खामोशी से दर दर भटकने को मजबूर हैँ,, इन्हे पालने वाले कभी इन्हे किसी स्थाई जगह पर बांधते ही नहीं,, क़ोई इन्हे घास चराने भी नहीं जाता,, इनके लिए क़ोई चारा भी नहीं लाता सब कुछ तुम्हारी आस्था पर निर्भर है,, लेकिन गाय मर गई,, बीमार हो गई,, गाय का पैर टूट गया तो गो सेवक अपनी सेवा का झंडा गाड़ने में पीछे नहीं रहते,, जबकि आवारा गौ वंश पर होने वाले हर अत्याचार के लिए समाज दोसी है,, क्यों कि गौ वंश से सिर्फ दूध का फायदा लेना ना इंसाफ़ी है,,!क्या नगरपालिका शिवालिक नगर इस मामले को संज्ञान में लेकर क़ोई कड़ा कदम उठाएगी या फिर यू ही चलता रहेगा यह गोरख धंधा,,???

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