कहीं सवालों के चक्रव्यूह में फंसती तो नहीं जा रही भाजपा,,?
( नीचे से ऊपर तक सिस्टम हुआ हैंग,, अपनी अपनी ढपली अपना अपना राग,,जो अवैध अब वो सब वैद्ध है,,, ऐसा क्या,,? )
( हिंदुत्व से यू सी जी तक का अविस्मरणीय यादगार सफर )
बीते एक वर्ष का संपूर्ण अध्ययन करें तो भारतीय जनता पार्टी को विपक्ष ने चौतरफा घेर रखा है। पहले तो लगता था कि विपक्ष को भारतीय जनता पार्टी समय पर चित कर देगी लेकिन इस बार भाजपा का कोई आरोप और कोई रणनीति विपक्ष को घेरने के मुद्दे पर सफल होती दिख नहीं रही है। और इस घेराव के परिणाम भी अब दिखाई देने लगे हैं। अगर हाल ही में हुए एमएलसी चुनावों का समीक्षात्मक अध्ययन करेंगे तो स्नातक और पढ़े- लिखे लोगों का माना जाने वाला यह चुनाव का परिणाम यह सोचने को विवश कर रहा है कि क्या भाजपा के कोर वोटर (पढ़ा-लिखा वर्ग) का मूड उसकी ओर से बदलता दिख रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने देश की ऐसी सीटों पर हार का स्वाद चखा है जहां से उसको ऊर्जा मिलती है। पहले यूपी की बात करें तो यूपी की सबसे अहम सीटें-अयोध्या, मथुरा, काशी, आगरा, गोरखपुर और लखनऊ हैं और अयोध्या तो लोकसभा चुनाव में भाजपा के हाथों से निकल गयी थी। और अब एमएलसी के परिणामों की बात करें तो गोरखपुर किसी तरह हांफते-हांफते भाजपा जीत की रेखा छू सकी। बाकी सभी जगह उसे निराशा ही हाथ लगी।


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