यह त्यौहार नरक चौदस व नर्क चतुर्दशी के नाम से भी प्रसिद्ध है।सचिन त्यागी,,!
संपादक शिवाकांत पाठक,,
एक भेंट के दौरान सचिन त्यागी त्यागी ऐसोसिएट्स के प्रमुख पदाधिकारी,, समाजसेवी होने के साथ ही अपने विवेक से तमाम अनसुलझे कार्यों का निराकरण करने की क्षमता रखने वाले,, श्री त्यागी ने नवोदय नगर वार्ड नंबर 13 टिहरी विस्थापित की जनता को हृदय से शुभकामनायें प्रदान की,, साथ ही कहा कि,मान्यता है कि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन प्रातःकाल तेल लगाकर अपामार्ग (चिचड़ी) की पत्तियाँ जल में डालकर स्नान करने से नरक से मुक्ति मिलती है। विधि-विधान से पूजा करने वाले व्यक्ति सभी पापों से मुक्त हो स्वर्ग को प्राप्त करते हैं।
आश्विन कृष्ण चतुर्दशी
संध्या को दीपदान की प्रथा है जिसे यमराज के लिए किया जाता है। दीपावली को एक दिन का पर्व कहना न्योचित नहीं होगा। इस पर्व का जो महत्व और महात्मय है उस दृष्टि से भी यह बहुत महत्वपूर्ण पर्व व हिन्दुओं का त्यौहार है। यह पांच पर्वों की श्रृंखला के मध्य में रहने वाला त्यौहार है जैसे मंत्री समुदाय के बीच राजा। दीपावली से दो दिन पहले धन-त्रयोदशी (धनतेरस) फिर नरक चतुर्दशी (नरक चौदस) व छोटी दीपावली फिर दीपावली और गोवर्धन पूजा व बलि प्रतिपदा, भ्रातृ-द्वितीया (भाईदूज) ।

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