कांव कांव,,कानून है या जादू की छड़ी, जीरो अंक आने पर भी डॉक्टर,,!हाश्य व्यंग,,
( स संपादक शिवाकांत पाठक,, )
फेंक चंद,,, यदि सच्ची लगन और कुछ कर दिखाने का जज्बा हो तो असम्भव कार्य भी सम्भव हो जाते है,,
दिमागी लाल,, वो कैसे,,?
फेंक चंद,,, लोग वर्षो पढ़ाई करते हैं लाखों रूपये माँ बाप को खर्च करने पड़ते है, बच्चों को रात दिन मेहनत कर पढ़ाई करनी पडती है तब जाकर अच्छे नम्बर आते हैं और अच्छे नंबरों से ही कम्पटीशन में बैठने का मौका मिलता है तब जाकर नौकरी लगती है,, और मैंने ऐसा फार मूला तैयार किया है जिसमें न पढ़ाई का टेंसन न पैसों का खर्च बस खाली डिब्बे में जादू की छड़ी घुमाना है,,और एक मिनट में डिब्बे से डॉक्टर निकलेगा वह भी होनहार काबिल,,
दिमागी लाल,,, ओय तूने लगता है आज भांग पी रखी है, चल तुझे घर छोड़ कर आते हैं,, वरना भाभी जी तलाश करने निकल पड़ेगी,,
फेंक चंद,,, भाभी कैसी भाभी,, वो तो वर्षो पहले मुझे पागल समझ कर छोड़ कर जा ली,, क्योकि औरतों में बुद्धि की कमी होती है उन्हें क्या मालूम इंसानी दिमाग़ जब पूरी तरह क़ाम करता तो दुनियां सलाम, नमस्ते करती है,, बड़े बड़े पढ़े लिखे बोलते हैं नमस्कार साहब, क्योकि पढ़ाई लिखाई तो इंसानो की बनाई हुई एक छोटी सोच है,, यदि पढ़ाई इतनी ही जरुरी होती तो ऊपर वाला पढ़े लिखे इन्शान बनाता,, इतिहास बताता है कि जो लोग अनपढ़ थे उन्होने ऊपर वाले को पा लिया और पढ़े लिखे आपस में बहस करते रहे,,
दिमागी लाल,, कैसी बहस,,,?
फेंक चंद,,, यही कि मै ज्यादा काबिल हूँ,, तू कम अकल है,, लेकिन इतिहास उठाकर देखो अनपढ़ लोंगो ने कभी बहस नहीं की,, बस थोड़ा कहना ही ज्यादा समझो,, मैं पढ़ा लिखा तो ज्यादा नहीं हूँ लेकिन हुनर ऐसे हैं की सारी दुनियां मेरी जेब में,,, 😂😂😂😂😂

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