ईश्वर पर अटल विश्वास है तो दुनियां की क़ोई ताकत तुम्हे छू भी नहीं सकती,,!स संपादक शिवाकांत पाठक,,!
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एक बार प्रह्लादजी नगर विचरण के लिए निकले तो उन्होंने देखा कि एक बूढ़ी कुम्हारिन बहुत रो रही है, वे उसके पास गए और पूछा–‘माई ! वो क्यों रो रही है ?’
उस बूढ़ी माई ने कहा–‘कल उसकी बिल्ली ने एक कच्ची मटकी में दो बच्चे दिए थे, गलती से मैंने वो कच्ची मटकी अन्य कच्ची मटकियों के साथ आवे में रख कर आग लगा दी है, अब भगवान से प्रार्थना कर रही हूँ कि ‘आप ही हो जो उन्हें बचा सकते हो।’
प्रह्लाद जी ने पूछा–‘क्या भगवान् सचमुच उन्हें बचा सकते हैं ?’
बूढ़ी माई बोली–‘अवश्य बचा सकते हैं।’
प्रह्लादजी ने कहा–‘आप आवे को कब खोलेंगी ?’
बूढ़ी माई ने कहा–‘कल।’
प्रहलाद जी बोले–‘आवे को मेरे आने के बाद ही खोलना।’
अगले दिन जब प्रह्लादजी वहाँ आये तो आवा खोला गया। प्रह्लादजी ने देखा कि सारी मटकियाँ आग पकड़कर पक चुकी थीं सिवाय एक के और ये वही मटकी थी जिसमें बिल्ली के बच्चे थे।
आग ने उस मटकी को छुआ तक नहीं, दोनों बिल्ली के बच्चे उसमें सुरक्षित थे। यह देख कर प्रह्लादजी का प्रभु पर विश्वास दृढ़ हो गया और वो निर्भय हो कर प्रभु आश्रित हो गए।
॥जय जय श्री राधे राधे 🙏🙏🙏वी एस इंडिया न्यूज़ ॥

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