ग्राम पंचायत का ठेका, वसूली सिडकुल-PWD जमीन से क्यों — ये कैसा नियम? : पंकज पाल धनगर,!

 


( पीठ का ठेका बना दैनिक वसूली,,तयबाजारी या लूटबाज़ारी,गरीबो से सौ रूपये रोज ,)


रोशनाबाद सलेमपुर ग्राम पंचायत में इन दिनों तहबाजारी के नाम पर जो खेल चल रहा है, उसने पूरे सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आखिर किस नियम के तहत ग्राम पंचायत ने सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र और PWD की जमीन पर ठेका जारी कर दिया? क्या पंचायत की सीमा इतनी बढ़ गई है कि अब दूसरे विभागों की जमीन से भी वसूली होने लगी?

सबसे बड़ा सवाल ग्राम प्रधान और जिम्मेदार अधिकारियों से है—जिस जगह का तहबाजारी ठेका दिया गया, क्या वह जमीन वास्तव में ग्राम पंचायत की है भी या नहीं? स्थानीय लोगों के अनुसार जहां वर्षों से बाजार लगता आ रहा है, वह खसरा नंबर 539 सहित अन्य भूमि सिडकुल के नाम दर्ज है, जबकि सड़क किनारे ठेले लगाने वाली जगह PWD के अधिकार क्षेत्र में आती है। ऐसे में वहां से रोज़ाना ₹50 से ₹100 और बाजार के दिन ₹200 तक की वसूली करना सीधा-सीधा नियमों की धज्जियां उड़ाना है।

यह वसूली किसी व्यवस्था का हिस्सा नहीं, बल्कि गरीबों की जेब पर डाका है। दिनभर मेहनत कर ₹100–₹200 कमाने वाले ठेले वालों से इस तरह की जबरन वसूली उनके पेट पर लात मारने के बराबर है।

अब वक्त है कि ग्राम पंचायत पहले अपनी सीमा तय करे और अवैध वसूली पर तुरंत रोक लगाए। साप्ताहिक तहबाजारी की पुरानी व्यवस्था ही गरीबों के लिए राहत का रास्ता बन सकती है।

जिलाधिकारी हरिद्वार से मांग है कि इस पूरे मामले में तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच कराई जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

गरीबों की उम्मीद अब सिर्फ प्रशासन से है—क्या उनकी आवाज सुनी जाएगी या यूं ही दबा दी जाएगी?

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