अमावस्या के दिन क्यों है उपवास जरुरी जानिए आध्यात्मिक सच,!

 


स संपादक शिवाकांत पाठक,,


( भौमवती अमावस्या (14 जुलाई 2026) को पीपल के पेड़ के नीचे दिया जलाने से पितृ और देवता प्रसन्न होते हैं, और साथ ही अच्छी आत्माएं घर में जनम लेती हैं )

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1= अमावस्या को घर के कोने कोने को अच्छी तरह से साफ करें, सभी प्रकार का कबाड़ निकाल कर बेच दें।


2= इस दिन सुबह शाम घर के मंदिर और तुलसी पर दिया अवश्य ही जलाएं इससे घर से कलह और दरिद्रता दूर रहती है ।


3= अमावस्या को गाय को पांच फल भी नियमपूर्वक खिलाने चाहिए, इससे भी घर में शुभता एवं हर्ष का वातावरण बना रहता है ।


4= अमावस्या की तिथि को कोई भी नया कार्य, यात्रा, क्रय-विक्रय तथा समस्त शुभ कर्मों को निषेध कहा गया है, इसलिए इस दिन इन कार्यों को नहीं करना चाहिए।


5= अमावस्या के दिन किसी दूसरे का अन्न खाने से १ महीने के साधन-भजन का पुण्य खिलाने वाले व्यक्ति को मिल जाता है l इसलिए अमावस्या के दिन मुफ्त का अन्न न खाएं l


6= अमावस्या के दिन क्रोध, हिंसा, अनैतिक कार्य, माँस, मदिरा का सेवन एवं स्त्री से शारीरिक सम्बन्ध, मैथुन कार्य आदि का निषेध बताया गया है, जीवन में स्थाई सफलता हेतु इस दिन इन सभी कार्यों से दूर रहना चाहिए


7= अमावस के दिन एक ब्राह्मण को भोजन अवश्य ही कराएं। इससे आपके पितर सदैव प्रसन्न रहेंगे, आपके कार्यों में अड़चने नहीं आएँगी, घर में धन की कोई भी कमी नहीं रहेंगी और आपका घर –  परिवार को टोने-टोटको के अशुभ प्रभाव से भी बचा रहेगा।


8= अमावास्या तिथि में वनस्पतियों में सोम का वास होने से उस दिन बैलों को हल में जोतने का पूर्णतः निषेध 'स्मृतियों' में किया गया है। उस दिन बैलों को पूरे दिन चरने के लिये छोड़ देना चाहिये, जिससे चारे के द्वारा अमृत कला का पान कर वे अपने शरीर को पुष्ट कर कृषि के कार्य में अधिक सहयोग कर सकें।


9= अकाल मृत्यु घर में न हो, जल्दी-जल्दी किसी की मृत्यु न हो उसके लिए घर में अमावस्या के दिन गीता का सातवां अध्याय पढना चाहिये | पाठ पूरा हो जाय तो सूर्य भगवान को अर्घ्य देना चाहिये कि हमारे घर में सबकी लंबी आयु हो और जो पहले गुजर गये है हे भगवान उनकी आत्मा को शांति दे और आज के गीता पाठ का पुण्य ये उनको पहुँचे |


10= अमावस्या पर पितरों का तर्पण अवश्य ही करना चाहिए । पितरों के निमित्त अमावस्या तिथि में श्राद्ध व दान का विशेष महत्त्व बताया गया है। इस तिथि में पितरों के उद्देश्य से किया गया दानादि अक्षय फलदायक होता है।


11= शास्त्रो के अनुसार पितृगण अमावस्या के दिन वायु रूप में सूर्यास्त तक घर के द्वार पर उपस्थित रहते हैं और अपने स्वजनों से श्राद्ध की अभिलाषा करते हैं।


12=  अतः इस दिन हर व्यक्ति  को यथाशक्ति उनके नाम से दान करना चाहिए। पितरों को खीर बहुत पसंद होती है इसलिए प्रत्येक माह की अमावस्या को खीर बनाकर ब्राह्मण को भोजन के साथ खिलाने पर महान पुण्य की प्राप्ति होती है,


13=  जीवन से अस्थिरताएँ दूर होती है। पितृ पूजा करने से मनुष्य आयु, पुत्र, यश कीर्ति, पुष्टि, बल, सुख व धन धान्य प्राप्त करते हैं।


14= धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि अमावस्या को व्रत करना चाहीये, अर्थात निराहार रहकर उपवास करना चाहिये।


15=  उप-समीप, वास-निवास अर्थात् परमात्मा के समीप रहना चाहिये। अमावस्या के दिन ऐसे ही कार्य करने चाहियें, जो परमात्मा के पास में ही बिठाने वाले हो। सांसरिक खेती-बाड़ी, व्यापार आदि कर्म तो परमात्मा से दूर हटाने वाले हैं।


16=  संध्या हवन, सत्संग, परमात्मा का स्मरण ध्यान कर्म परमात्मा के पास बैठाते हैं। इसलिए माह में एक दीन उपवास अवश्य ही करना चाहिये और वह दिन अमावस्या का ही श्रेष्ठ मान्य हैं,


17=  क्योंकि सूर्य और चन्द्रमा ये दोनों शक्तिशाली ग्रह अमावस्या के दिन एक ही राशि में आ जाते हैं। चन्द्रमा ही सभी औषधियों को रस देने वाला हैं। जब चन्द्रमा ही पूर्ण प्रकाशक नहीं होगा तो औषधी भी निस्तेज हो जायेगी। ऐसा निस्तेज अन्न, बल, वीर्य, बुद्धिवर्धक नहीं हो सकता; किन्तु बल, वीर्य, बुद्धि आदि को मलीन करने वाला ही होगा। इसलिये अमावस्या का व्रत करना चाहिये।


18= उस दिन अन्न खाना वर्जित किया गया है और व्रत का विधान किया गया है।


19= और किसी क्रांति के पहले एक वैचारिक क्रांति होती है और मैं अभी उसी वैचारिक क्रांति के लिए ही आपको प्रेरित कर रहा हूँ । वैचारिक क्रांति कैसे होगी ? वैचारिक क्रांति तब होगी जब ज्यादा से ज्यादा लोगों तक ऐसी बातें पहुंचाई जाये और मुझे उम्मीद ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आप सभी इसको ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएंगे ।

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