डॉक्टर तो भगवान का स्वरुप होता है और भगवान निर्दयी या लालची नहीं हो सकता,!

 


 संपादक शिवाकांत पाठक,,

( डॉक्टरों की लापरवाही की पूरी जिम्मेदारी हरिद्वार जिला प्रशासन की,,, अवनीश कुमार मिश्रा )

( मामला एक इंसान की जिंदगी का है इसलिए गंभीरता से ले जिला प्रशासन , यमराज का दूसरा रूप तो नहीं है,,)


( कर्मचारियों और परिजनों ने डीएम और एसडीएम को मौके पर बुलाने की मांग की  जो कि जायज थी )


मृतक श्री चंद हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड में एक मजदूर कि तरह कार्य करने वाले व्यक्ति थे, सारा परिवार उनकी ही मेहनत से चल रहा था एक्सीडेंट के बाद आप्रेसन के दौरान डॉक्टर कि लापरवाही के चलते उनकी मृत्यु हुई,, इस बात को लेकर मानवता वश आज कम्पनी के सहकर्मियों द्वारा धरना प्रदर्शन किया गया,, लेकिन जो सच है वह तो स्वीकार करना ही होगा,, यह घटना क़ोई नई घटना नहीं है ऐसी घटनाओ को आप पहले भी सुनते  और पढ़ते रहें हैँ,जैसे,पैसे का भुगतान ना होने पर अस्पताल से लाश नहीं उठने दी,, तो फिर डॉक्टर को भगवान का रूप बताया गया है, और भगवान दया का सागर होता है,, उसमें उदारता, करुणा, प्रेम, समाहित होता है, फिर हम डॉक्टर को कैसे भगवान मान सकते हैं, जो कि चंद पैसों के लिये मरीज कि जान ले ले,,,


धर्म का अर्थ, हिन्दू, मुस्लिम, सिख या ईसाई नहीं वल्कि तमाम धर्मो को हम जानते ही नहीं हैँ,, क्यों कि हमको उलझा दिया गया है,, 

 पढ़िए,, पति धर्म, पत्नी धर्म, पुत्र धर्म, पिता का धर्म, राज धर्म, वैद्ध धर्म, जैसे कि लक्ष्मण को शक्ति लगने पर वैद्ध सुसेण ने निभाया,, और सबसे बड़ा धर्म है मानव धर्म,,जिसमें कि आज लालच, लोभ  और मोह के बसीभूत होकर, अपना धर्म खोने वाले यह नहीं समझ पा रहे हैँ कि इन सब बातों का परिणाम जब ईश्वर या उसकी माया उसकी शक्ति देगी तो बहुत ही भयावह होगा,,,

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