कडुआ सच जो सुनने में अजीब है लेकिन जीवन का अटूट सत्य है,,मानोगे नहीं तो बाद में सोचोगे,,!
संपादक शिवाकांत पाठक,,
मेरा अपना अनुभव,, जो स्वयं सामने आया जीवन में,, मेरा क़ोई करीबी जब रोया तो मैंने आंशू पोछे,, हर सम्भव उसका साथ दिया,,, लेकिन उन्ही प्रिय जनों ने जब अपनी वास्तविकता से मुझे रूबरू कराया तो अंतर्मन में कितनी असहनीय पीड़ा या कष्ट हुआ जिसे लिखा नहीं जा सकता,, हाँ इतना जरूर कहूंगा कि आपके द्वारा किसी पर किया गया विश्वास महज एक वेवकूफी होती है वह भी उस पर जिसकी फितरत में चलाकियो के शिवा कुछ भी न हो,,, तुमने सुना होगा की ऊपर वाला जो भी करता है अच्छे के लिये करता है,, बुरा वक्त हमेसा ईश्वर इसलिए देता है ताकि आप समझ सके कि तुम जो सदा जिनके लिये समर्पित रहे उनके हृदय में तुम्हारा क्या स्थान है,, तभी तो रहीम दास जी लिखते हैँ कि,,,,
रहिमन विपदा ही भली जो थोड़े दिन होय,, हित अनहित या जगत में जान परे सब कोय,,,
पुराने अध्यात्म वादी लोंगो ने नई पीढ़ी को जो दिशा देने हेतु अपने जीवन के कडुए अनुभव से परिचित कराया वह सब कुछ यथार्थ है,, इसलिए कितना भी समाज में बदलाव हो आप प्राचीन पुराने बुद्धिजीवियों के बताये रास्ते पर चलते रहें तभी कामयाबी के शिखर पर पहुंच सकते हैँ,, जो आपको आपके बुरे वक्त पर इग्नोर करे आप शांत रहें और अपने दिमाग़ में एक स्थान पर उसे रोक दें,, आने वाले समय का इंतजार करें,, यह समय बहुत ही बलवान होता है,, बड़े बड़े शहंशाह नहीं रहे,, एक दिन समय आपका होगा और बर्बादी उनकी,, और आप दृष्टा होंगे,, यानि देखने वाले,, यही सत्य है,,
जीवन बहुत ही संघर्षमय होता सुख दुख के मिले जुले संगम का नाम ही जीवन है,, जैसे रात्रि के बाद दिन, वर्षा के बाद शीत ऋतु,, वैसे ही सुख दुख,, यहाँ पर स्थाई कुछ भी नहीं है,,

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