कडुआ सच है जरुर पढ़िए,,आज रावण को जलते हुए देखने जा रहे हो तो पहले अपने अंदर देखलो,,!

 


 शिवाकांत पाठक स्वतन्त्र लेखनी,,





क्या आप भी रावण को देखने गये थे तो पढ़िए,,आज विजय दशमी है आज दसरथ नंदन प्रभु राम ने अपने सत्य, त्याग और साहस  और शक्ति के बल पर अजेय रावण को सपरिवार मृत्यु के मुँह मे जाने के लिए विवस कर दिया था,,यह बात हजारों वर्ष पहले की है,, जगह जगह रामलीला होती है, पात्र भी साधारण नहीं होते,, लेकिन एक बार मंदोदरी ने रावण से पूछा नाथ आप तो माया के जानकार है आप राम का रूप रखकर सीता के पास क्यों नहीं जाते,, रावण बोला मंदोदरी मैंने कई बार प्रयास किया लेकिन जब भी मैंने राम का रुप रखा तब तब मेरी आत्मा ने मुझे सीता तक नहीं जाने दिया,,




 क्यों की राम एक आदर्श पुरुष हैँ,, उनके नाम या रुप का  का स्मरण ही सत्य की ओर ले जाने वाला है,, अब आप खुद ही समझदार हैं आज उनका भेष बना कर भी लोगो को उनकी आत्मा क्यों नहीं समझाती,,,रावण बुराई का प्रतीक है,,और हम बुराई देखने जा रहे हैँ,, अपने अंदर नहीं बाहर कहाँ कहाँ बुराई है हमको स्पष्ट दीखती है हमारी देखने की शक्ति इतनी तीव्र है कि हम खुद को छोड़ कर दिल्ली मे बैठे लोंगो तक की बुराई देखने मे सक्षम हैँ,, गिद्ध  और कबूतर की दृष्टि भी हमारे सामने क़ोई मायने नहीं रखती,,

बुराई तो हमने हर  परिवार, समाज,गली मोहल्ले के साथ खुद मे भी पाल रखी है लेकिन हमारे अंदर देखने की क्षमता ही नहीं है,,


यह सत्य है कि रावण एक महान ज्ञानी और शक्तिशाली होने के साथ साथ भूत, भविष्य, वर्तमान का पूर्ण ज्ञान रखता था उसने सभी देवताओं को परास्त किया था, मृत्यु पर भी विजय हांसिल कर ली थी लेकिन  इतना सब कुछ होने के बाद भी अन्याय,, अत्याचार और अभिमान किस तरह समाप्त होता यह बात हमारी प्राचीन संस्कृति एवम इतिहास बताता है कि सर्व शक्तिमान, बुद्धिमान, ज्ञानी, होने से ही आप सर्व समर्थ नहीं हो सकते,, अन्याय और अत्याचार का प्रतिफल जरुर मिलता है चाहे स्वयं ईश्वर को क्यों न आना पड़े,,


विनम्र अनुरोध 🙏आप जहाँ जिस हाल मे पद मे नौकरी मे या आमजन हैँ तो अपने और परिवार की सुरक्षा के लिए,, विधि के विधान के दंड से बचने हेतु,,आप अभी इसी समय से हर गलत कार्य को ना करने कि अंतर्मन से प्रतिज्ञा लें,, कि आज के बाद आप ऐसा क़ोई भी कार्य नहीं करेंगे जिससे किसी कि आत्मा को कष्ट हो, और वह राष्ट्र एवम समाज के प्रति आपके उत्तरदायित्वों के विरुद्ध हो,,

वरना युग क़ोई भी हो संसार का निर्माण करने वाला आपकी हर गतिविधियों पर नजर रखता इस बात को आप माने या न माने इससे उस मालिक को क़ोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन तुम जैसे कर्म करोगे उन कर्मो का फल तुम्हारे साथ पूरे परिवार को भी भुगतना होग़ा यही प्रमाण है विजय दशमी,, रावण का सपरिवार विनाश,,,

आप को सही लगे तो मानना बाकी जो होना है उसे क़ोई टाल नहीं सकता,, 🙏🙏🙏🙏

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