ईश्वरीय वैभव की अनुभूति हेतु उत्तम विधि है ध्यान ?
योगी राज रूपेश,,,,
स संपादक शिवाकांत पाठक,,,
भारत में जन्मे तीन संप्रदाय
हिंदू ,
जैन ,
बौद्ध,
तीनों की आत्मा है ध्यान और जिज्ञासा है प्राण
यहूदी, ईसाई, इस्लाम, में ध्यान का कोई स्थान व महत्व नहीं है ।
वहां सत्य की जिज्ञासा के लिए कोई स्थान नहीं उनके धर्म पुस्तक में जो भी ऊट पटांग लिखा है वहीं अंतिम सत्य है इसी तथ्य पर मेरी नजर में वे जड़ अंधविश्वासी हैं ।
ध्यान और जिज्ञासा की हवा यदि भारत में नहीं बनेगी मात्र हिंदुत्व का ढोल ही पीटा जाएगा और विश्व गुरु होने की शेखी बघारी जाएगी तो यह भारत के दुर्भाग्य की पराकाष्ठा होगी ।
योगी कौन थे क्या हो गए क्या होंगे
अभी ।
कहते रहो कोई ना कोई तो समझेगा
कभी ।।
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