पहले भी थे और आजभी हैँ जनता केलिए सबकुछ त्याग करने वाले दीपक नौटियाल सभासद,,!

 


स संपादक शिवाकांत पाठक,,



यदि हम 6 वर्ष पूर्व के अतीत मे जाकर देखे तो एक समाज सेवी के रूप मे नवोदय नगर की हर गली हर चौराहे पर जनता की हर बात को सुनकर उसे समाधान के द्वार तक पहुंचाने का जज्बा रखने वाले शख्स का नाम दीपक नौटियाल उभर कर सामने आता है,, सत्य कडुआ होता है सत्य परेशान भी होता है लेकिन अंत मे सत्य की जीत होती है,, क्यों की सत्य को किसी भी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती वह स्वयं सृष्टि के संचालन करने वाले विधाता का स्वरूप होता है,, एक ऐसा शख्स जिसे बदले मे कुछ नहीं चाहिए था,, समाज सेवा उसका स्वभाव था,, गीता में श्री कृष्ण कहते है कर्मण्येवादिकारस्ते  मा फलेसु कदाचिन: बस वही तो किया उस शख्स ने जिसे विधाता भी स्वयं विजय श्री दिलाने हेतु उसके साथ  जन शक्ति रूप में देखने को मिला,, जिस समय नगर पालिका अध्यक्ष ने समाज सेवी दीपक नौटियाल की पीठ थपथपाई,, उस समय के दृश्य को वर्णनन नहीं किया जा सकता,, क्यों की अध्यक्ष नगर पालिका के प्रतिनिधित्व में हार के वावजूद जीत जैसा अवसर मिलना निस्वार्थ सेवा का ही परिणाम था,,जीत हनुमान की ही नहीं राम की भी हुई थी,, लेकिन राम जीत का श्रेय हनुमान को देना चाहते थे,, और हनुमान कहते है की प्रभु सब कुछ आपकी कृपा से सम्भव हुआ,, जीत के बाद राम हनुमान को सीने से लगा लेते है लेकिन हनुमान एक सेवक बनकर निरभिमानता का उदाहरण पेस करते है,, इस घोर कलियुग में भी राम ( अध्यक्ष नगर पालिका,),,,हनुमान ( दीपक नौटियाल,) का प्रेम एक मिशाल बन गया,,



बार बार प्रभु चहइ उठावा। प्रेम मगन तेहि उठब न भावा॥

प्रभु कर पंकज कपि कें सीसा। सुमिरि सो दसा मगन गौरीसा॥

हनुमान जी सेवक है और सेवक ही चरणों के उपासक होते है अतः अपने इष्ट  के चरण पाकर छोड़ना नहीं चाहते। और भक्त तो सदा ही प्रभु के कर कमलों का स्पर्श  चाहता भी है  शिवजी को हनुमान रूप में यह आनंद प्राप्त हुआ इसका स्मरण करके उसी प्रेम में मग्न हो गये क्योंकि यह परम लाभ है तभी तो भक्त ऐसी ही अभिलाषा करते है। कथा कुछ क्षण के लिए रुक जाती है।

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