सवाल अपने आपसे,,जो हमको दिखता नहीं उस पर हम विश्वास नहीं करते, तो क्या आपने हवा को देखा है,,?स संपादक शिवाकांत पाठक,!

 





जब क़ोई पतंग उड़ाता है तो डोर उसके हाँथ में रहती है जब चाहे खींच लेता है ऊपर नीचे पतंग ले जाने का सारा सिस्टम उसके हाँथ  में होता है ठीक उसी तरह आप भी ईश्वर की कठपुतली ही हो आपके द्वारा किये गये कर्मो के अनुरूप वह जब जैसा चाहता है तुम वही करते हो,, लेकिन तुम्हे यह अहसास होता है कि जो भी कार्य मेरे द्वारा हो रहा है वह मैं कर रहा हूँ  बस इस  कर्ता पन के अभिमान के कारण तुम्हे बार बार जीवन और मृत्यु की असहनीय पीड़ा से गुजरना पड़ता है,, तमाम योनियों में जन्म लेना पड़ता है,, गीता में भगवान श्री कृष्ण ने बार बार कर्म को श्रेष्ठ बताया है,, फिर भी यदि हम कर्म के प्रति बिना सोचे समझे क़ोई निर्णय लें तो मूर्खता है,, मानव जीवन सभी योनियों में श्रेष्ठ है फिर भी हम जो कुछ हांसिल करने के लिए प्रयास रत रहते हैं वह सब नाशवान है,, रिश्ते, नाते, धन, यश, वैभव, बंगला, गाड़ी सब कुछ नष्ट हो जाना है,, तो हमारी मानव जीवन की पूँजी हमने कितनी एकत्रित की यह भी तो सोचना हमारा फ़र्ज है,,जिसकी बिना मर्जी के आप एक सांस नहीं ले सकते क्या आपने उस ईश्वर, अल्लाह, या मालिक को याद किया,, नहीं क्यों कि समय नहीं था,, और समय भी उस मालिक के अधीन है यही सत्य है,, कभी कभी हम बीबी बच्चों के लिए माँ बाप को इग्नोर कर देते है,, जबकि बीबी बच्चों से पहले हमारे जीवन को देने वाले हमारे माता पिता होते है,, इसी तरह इस संसार को जन्म देने वाले परम पिता के लिए समय निकाले,, साथ ही मानव ईश्वर कि सबसे प्रिय रचना है इसलिए आप ऐसा कार्य प्रतिदिन जरूर करें जिसके बदले में आपको कुछ भी न मिले,, और कार्य परोपकार का हो,,, बाकी आप स्वयं बुद्धिमान हैं 🙏🙏🙏🙏🙏

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