दूध का दूध पानी का पानी,,पांच सौ से ज्यादा गायों की सड़ी हुए लाशें...जैसलमेर में डंपिंग यार्ड की डरावनी तस्वीर,,,!
( सी साहब क़ोई है आपके पास जबाब,,? )
गो द्विज धेनु देव हितकारी। कृपासिंधु मानुष तनुधारी।।
जन रंजन भंजन खल ब्राता। बेद धर्म रच्छक सुनु भ्राता ।।
उन कृपा के समुन्द्र भगवान् ने पृथ्वी , ब्राह्मण, गो और देवताओ का हित करने के लिए ही मनुष्य शरीर धारण किया है । हे भाई ! सुनिए, वे सेवको को आनन्द देने वाले , दुष्टो के समूह का नाश करने वाले वेद तथा धर्म की रक्षा करने वाले है ।।
राजस्थान के जैसलमेर से एक बेहद डरावनी तस्वीरें सामने आई है,
एक दर्दनाक तस्वीर ने गौ संरक्षण और सरकारी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. नगर परिषद के डंपिंग यार्ड में सैकड़ों मृत गायों के शव मिलने के बाद लोगों में भारी नाराजगी है. वीडियो वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है और प्रशासन से जवाब मांगा जा रहा है.
राजस्थान में जैसलमेर की कचरा डंपिंग साइट पर रविवार को करीब पांच सौ से ज्यादा की संख्या में गायों के सड़ी हुए शव मिलने के वीडियो सामने आया है. डंपिंग यार्ड में नगरपरिषद के मृत पशुओं के अधिकृत हड्डी ठेकेदार द्वारा इन मरी हुई गायों के शवों के निस्तारण न करने से आमजन में नाराजगी का माहौल व्याप्त है. मृत गायों के शवों के वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने से गो प्रेमियों में यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है.
ठेकेदार को नोटिस जारी
उधर, जैसलमेर जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल ने इस संबंध में मामले को गंभीरता से लेते हुए फैक्चुअल रिपोर्ट मांगी है. इसके अलावा नगरपरिषद कमिश्नर लजपाल सिंह सोढा ने भी इस मामले में संज्ञान लेते हुए यार्ड के मृत पशुओं के ठेकेदार को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है. फिलहाल नगरपरिषद ने मृत पशुओं को डंपिंग यार्ड से हटाकर निस्तारण कर दिया है.
देखभाल और संरक्षण के दावे खोखले
असल में मंचों से गौ रक्षा के बड़े-बड़े नारे सुनाई देते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार बेहद दर्दनाक तस्वीर पेश करती है. जैसलमेर से सैकड़ों की संख्या में मरी हुई गायों की सामने आई तस्वीरें यही सवाल खड़ा कर रही हैं कि आखिर गायों की देखभाल और संरक्षण के दावे कितने मजबूत हैं. बदहाल हालत में बेसहारा घूमती गायें और उनकी खराब स्थिति सरकारी व्यवस्थाओं पर सवाल उठाती नजर आ रही हैं. लोग कह रहे हैं कि गाय के नाम पर राजनीति करने वालों को इन हालातों पर भी ध्यान देना चाहिए. गौशालाओं, चारे, पानी और उपचार की बेहतर व्यवस्था की मांग एक बार फिर तेज हो गई है.

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