जो भी आप देख रहें है यह विनाश की शुरुआत है जिसे क़ोई भी रोक नहीं सकता,, हाई एलर्ट कर सकता है,,!
स संपादक शिवाकांत पाठक,!
( समय बहुत बलवान होता है,, समय ही ईश्वर है परमात्मा है,,)
प्रत्येक मनुष्य जो पढता देखता सुनता या अनुभव करता है उसी के अनुसार अपने सत्य का निर्माण करता है। उसका सत्य उसकी कल्पना पूर्वाग्रह धारणा और व्यक्तिगत ज्ञान के आधार पर होता है। साथ ही धर्म गुरुओं के बताये गये मार्ग भी मनुष्य के मन पर प्रभाव डालते हैँ,, लेकिन यह सच है की हर मनुष्य सत्य या ईश्वर की व्याख्या अपने विवेक ( विचार शक्ति )के अनुसार करता है,, किसी मोटर मैकेनिक से आप बात करके देखिए वह सिर्फ मैकेनिक लाइन पर बोलेगा,, मंदिर का पुजारी यदि सत्य की व्याख्या करेगा तो उसके पीछे धन का स्वार्थ होग़ा,,क्यों कि ईश्वर को वह भी नहीं जान पाया,, जिसने भी धन के लिए दौड़ लगाई वह आध्यात्मिक हो ही नहीं सकता,, ईश्वर देखने कि नहीं अपितु अनुभव करने की आवश्यकता है,, क्यों कि तुम्हे जो भी दिख रहा है वह सब कुछ ईश्वर का ही निर्माण है,,इंसान,,ज़मीन, आसमान, पेड़, पौधे, पशु, पक्षी,सूर्य, चाँद, हवा, पानी, लेकिन हम भूल गये कि जिसकी बिना मर्जी के हम सांस नहीं ले सकते,, तो फिर हमारा अस्तित्व क्या है,,? हम अपने अभिमान में अस्तित्व की बलि चढ़ा रहें हैं,, रावण को ही देखो कितना अभिमान था,, मैं ही ईश्वर हूँ,, मै अमर हूँ,, लेकिन अभिमान विनाश का संकेत है,, गीता का ज्ञान श्री कृष्ण ने दिया यह सत्य है लेकिन हममें से 99 प्रतिशत लोग न पढ़ते हैँ न ही जीवन में उतारते हैँ,, यह समय कलियुग के अंत के आरम्भ का है,, यह सत्य है,, क्योकि क्या आपने या आपके वैज्ञानिको ने 17 सितम्बर के बाद मूसलाधार वर्षा के बारे में सुना या देखा है,,? तो अब देख लो मानव जाति के द्वारा किये गये अन्याय, अत्याचार, अधर्म,, और प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का परिणाम आपके सामने है,, सारी ताकतें लगाओ फिर भी प्रकृति के सामने अपने को धूल के एक कण भी महसूस नहीं कर पाएंगे आप,,

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