जब भारत के प्रधान मंत्री रेहड़ी पटरी वालों को अपना मित्र कहते हैं तो फिर जुल्म क्यों,,? शिवाकांत पाठक महा सचिव रेहड़ी पटरी सहायता समिति।

 


हमारे देश के प्रधान मंत्री माननीय मोदी जी रेहड़ी पटरी वालों को अपना मित्र कहते हैं उनके भारत सरकार की ओर से लिए तमाम तरह की ऋण की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं,, और रेहड़ी पटरी वाले लोग भारत सरकार द्वारा ऋण प्राप्त करने के बाद यदि सड़क की सीमा को छोड़ कर अपनी रेहड़ी लगाते हैं तो फिर उनका चालान क्यों काटा जा रहा,, वह जितना वे दिन भर में कमाते हैं उससे अधिक की चालान राशि उनसे वसूलना कहां तक न्याय संगत है,,, और यदि यह कार्य वास्तव न्याय संगत नहीं है तो फिर निर्दोष गरीबों पर ढाए जा रहे जुल्मों का गुनहगार कौन है,,,? हमारे देश भारत में रहने वाला गरीब यदि अपनी रेहड़ी सड़क की सीमा से बाहर लगा कर अपना परिवार नहीं चला सकता तो क्या वह फल सब्जी बेचने विदेश जायेगा ताकि भूख से तड़प कर वह अपने परिवार को दम तोड़ते हुए ना देखे,,,

दीपक नौटियाल चेयर मैन प्रतिनिधि बी जे पी हरिद्वार ने कहा कि यदि यह जुल्म गरीबों के साथ किया जा रहा है तो मैं कड़े शब्दों में इसकी निंदा करता हूं और शीघ्र ही इस मामले को गंभीरता पूर्वक लेते हुए आला अधिकारियों तक पहुंचाने का वचन देता हूं,, क्यों कि गरीब व्यक्ति को अपने परिवार का भरण पोषण करना आवश्यक है और रेहड़ी अतिक्रमण की श्रेणी में नहीं आती है,,,

सरकार ने शहरी रेहड़ी-पटरी पर दुकान लगाने वाले विक्रेताओं (एसवी) के अधिकारों की रक्षा करने और रेहड़ी-पटरी या सड़क के किनारे सामान बेचने की गतिविधियों को विनियमित करने के उद्देश्य से रेहड़ी-पटरी दुकानदार (आजीविका संरक्षण एवं रेहड़ी-पटरी विक्रेता गतिविधि विनियमन) अधिनियम, 2014 को अधिनियमित किया था। संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा इस अधिनियम को इसके प्रावधानों के अनुसार शहरी रेहड़ी-पटरी पर दुकान लगाने के लिए नियम, उपनियम, योजना तथा कार्य प्रणाली तैयार करके कार्यान्वित किया जाता है। इस सिलसिले में आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने संसद की स्थायी समिति की सिफारिशों के आधार पर उपरोक्त अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के कार्यान्वयन के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार एजेंसी होने के कारण राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को परामर्श जारी किये हैं। रेहड़ी-पटरी दुकानदार (आजीविका संरक्षण एवं रेहड़ी-पटरी विक्रेता गतिविधि विनियमन) अधिनियम, 2014 में उपलब्ध कराए गए प्रावधान के अनुसार राज्य/शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) द्वारा प्रत्येक पांच वर्ष में कम से कम एक बार रेहड़ी-पटरी पर सामान बेचने वाले विक्रेताओं की पहचान करने के लिए सर्वेक्षण आयोजित किये जाते हैं।

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