नवीन प्रति या बंजर भूमि सरकारी नहीं वल्कि किसान की,,!सुप्रीम कोर्ट,!

 


स संपादक शिवाकांत पाठक,,,


रिपोर्ट मोहसीन अली,,,


सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, यदि किसी किसान की बंजर भूमि को 'नवीन प्रति' (जिस पर खेती नहीं की गई है) के रूप में वर्गीकृत किया गया है और वह सरकारी भूमि नहीं है, तो उस पर सरकार का अधिकार नहीं होगा। इसका मतलब है कि सरकार बिना उचित legal प्रक्रिया और मुआवजे के उस भूमि का अधिग्रहण नहीं कर सकती है। 

विस्तार में:

बंजर भूमि:बंजर भूमि वह भूमि है जिस पर खेती करना मुश्किल है या संभव नहीं है। 

नवीन प्रति:,यह उस भूमि को संदर्भित करता है जो खेती के लिए उपयुक्त नहीं है और जिसका उपयोग नहीं किया गया है। 

सरकारी भूमि:यह भूमि सरकार के स्वामित्व में होती है। 

सुप्रीम कोर्ट का फैसला:सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी किसान की बंजर भूमि, जो सरकारी नहीं है, पर 12 वर्षों तक किसी ने दावा नहीं किया है, तो उस पर कब्जा करने वाले व्यक्ति का अधिकार हो सकता है,

अधिग्रहण:

यदि सरकार को ऐसी भूमि की आवश्यकता है, तो उसे उचित लीगल   प्रक्रिया का पालन करना होगा, जिसमें भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत उचित मुआवजा देना शामिल है। 

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि बिना उचित प्रक्रिया के भूमि का अधिग्रहण मानवाधिकारों का उल्लंघन है। 

संक्षेप में, यदि किसान की बंजर भूमि निजी है और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है, तो सरकार उसे बिना उचित प्रक्रिया और मुआवजे के नहीं ले सकती है।

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