पुनर्वास का सच,,आपदा में भी अवसर खोज लेते हैँ रंग बिरंगे कागज के टुकड़ो के लालची,,!
( ओजस्वी मुख्यमंत्री उत्तराखंड से मांग है की इस मामले पर सी आई डी जांच कराये,, ताकि बेघर पहाड़ वासियों को उनका आसियाना और कृषि योग्य भूमि मिल सके, दीपक नौटियाल सभासद वार्ड नम्बर 13 ,)
स संपादक शिवाकांत पाठक,,
( पहाड़ो से पलायन की रणनीति और अवसर वादियों की बल्ले बल्ले, देवेंद्र प्रजापति पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शिव सेना ,)
टिहरी बांध परियोजना की शुरुआत 1949 में एक योजना के रूप में हुई, जिसके बाद 1961 में प्रारंभिक जांच हुई और 1972 में इसका डिज़ाइन तैयार हुआ, फिर 1978 में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा निर्माण कार्य शुरू किया गया, लेकिन बाद में देरी हुई, और 1988 में टिहरी जलविद्युत विकास निगम (THDC) का गठन किया गया, अंततः जुलाई 2006 में बिजली उत्पादन शुरू हुआ।
परियोजना का विकास:
1949: भागीरथी नदी पर एक बड़ी भंडारण परियोजना के रूप में परिकल्पना की गई।
1961: जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में प्रारंभिक जांच पूरी हुई।
1972: 600 मेगावाट के बिजली संयंत्र के साथ डिज़ाइन को मंजूरी मिली।
1978: उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने निर्माण कार्य शुरू किया, लेकिन वित्तीय और पर्यावरणीय कारणों से देरी हुई।
1986: सोवियत संघ से सहायता मिली, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता के कारण बाधित हुई।
1988: टिहरी जलविद्युत विकास निगम (THDC) का गठन प्रबंधन के लिए किया गया।
2006: बांध से बिजली उत्पादन शुरू हुआ और परियोजना का पहला चरण पूरा हुआ।
फिर हुआ टिहरी विस्थापित लोंगो के लिए सरकारी संवेदनाओं का शिलसिला शुरू,, सरकार ने टिहरी बांध में जलमग्न गावों के लोंगो के लिए तुरंत अस्थाई टीन सेट का निर्माण टिहरी में किया,, बस वहीं से शुरुआत हुई लालच के अंधे भूखे भेडियो की और गांव के सीधे सादे लोंगो ने सोचा कि बांध बनने के कारण उनको टीन सेट में रहने के लिए जगह दी गईं,, लेकिन वहां के कुछ बुद्धजीवी लोगो को जानकारी हुई की इन सभी के नाम पट्टों का आवंटन होगा,, यह बात विभागीय लोंगो कि सहमति से भी हो सकती थी,, विशेष ज्ञानी लोंगो ने जानकारी हांसिल करने के बाद एक चक्र व्यूह की रचना की जिसमे कि पट्टा धारको को मालूम भी नहीं चला कि उनके नाम पट्टा है,,
उदाहरण 👇
किसी भी पट्टा धारक के स्वामी के असली हस्ताक्षर कब्ज़ा लेटर पर नहीं हैँ,,
दूसरा उदाहरण 👇
क़ोई भी पट्टा धारक अपने पट्टे पर नहीं रह रहा, सिर्फ प्रॉपर्टी डीलरों द्वारा नवोदय नगर, सुमन नगर, सुभास नगर में या तो अवैध कलौनियों का निर्माण हुआ या फिर मकान बना कर बेंच दिए गये,,
दबी जुबान से दो माह पूर्व एक नवोदय नगर के प्रॉपर्टी डीलर ने कहा की मेरे दस लाख रूपये पुनर्वास विभाग एवम टी डी सी को गये हैँ,, पट्टा तो सौ प्रतिशत होगा,,
आगे की सत्य जानकारी कल शाम,, 8 बजे,, 🙏

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