जब तलक हिमालय का प्रहरी बन खड़ा हमारा हर जवान,,



 तब तक है सबकी आजादी, तब तक है सबकी आन बान,,

तब तक अभिव्यक्ति तुम्हारी है, तब तक ही भारत है महान,,

जब तलक हमारे भारत की सीमायें सुरक्षित रहती हैँ,,

जब तलक हिमालय का प्रहरी बन खड़ा  हमारा हर जवान,,

इतिहास सदा दुहराता है भारत की गौरव गाथाएँ,,

सावित्री हो या अनुसूईया सब थीं भारत की माताएँ,,

इस मातृ भूमि पर जब जब भी अनजाने में विपदा आई,

तब लाज बचाने भारत में आई हरदम लक्ष्मी बाई,,


जब जब भारत की धरती पर अन्याय और अत्याचार हुआ,


तब तब इस पवन धरम भूमि पर ईश्वर का अवतार हुआ,,


स्वरचित मौलिक रचना,

स संपादक शिवाकांत पाठक 

हरिद्वार उत्तराखंड

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