क्या वास्तव में हम नशा मुक्ति की ओर अग्रसर हैँ,,??




स संपादक शिवाकांत पाठक,,


नशे के खिलाफ छेड़े गये अभियान पूरी तत्परता के साथ अहम भूमिका निभा रहे है स्कूलों में जाकर छात्रों को नशे से होने वाले नुकसान बताये जा रहे है,, नशा मानव जीवन के लिए एक जहर तो है ही लेकिन देश प्रगति के रूप में आय का भी एक बहुत बड़ा साधन है,, इसलिए इसकी लत का शिकार हुए लोग इसे छोड़ नहीं पाते क्यों कि इसकी आपूर्ती सरकार द्वारा जगह जगह सरकारी दुकानों के जरिये होती है,,


उत्तराखंड में नए साल के जश्न के दौरान (दिसंबर 2025 के अंत तक) करीब ₹225 करोड़ की शराब की बिक्री हुई, जिससे राजस्व में वृद्धि हुई और यह दिखाता है कि पर्यटकों की संख्या बढ़ने से शराब की खपत भी बढ़ रही है, 👇


वर्ष 2024-25 के लिए उत्तराखंड के आबकारी विभाग का राजस्व लक्ष्य ₹4440 करोड़ है, जिसमें दिसंबर 2024 के अंत तक लगभग ₹3353 करोड़ की वसूली हो चुकी थी और वित्तीय वर्ष के अंत तक लगभग ₹4000 करोड़ की प्राप्ति हुई, जो पिछले वर्ष (2023-24) के ₹4000 करोड़ के लक्ष्य से अधिक है, और यह वृद्धि राज्य की आबकारी नीति 2024-25 के कारण हुई है, जिसमें शराब की कीमतों में वृद्धि और नई नीतियों के प्रावधान शामिल हैं।

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