सुखवंत सिंह मामले में अब क़ोई भी कार्यवाही या इल्जाम मौत की भरपाई नहीं कर सकता,,!

 


(  न्याय की सभी उम्मीदें टूटने पर  मजबूर होकर उठाया गया यह कदम एक बार फिर इन्शानियत को कटघरे में करती नजर आ रही है  )


📢 बड़ा सवाल,,???? जो सिस्टम को कचोट रहे हैं:

एक किसान को इंसाफ के लिए जान क्यों देनी पड़ी,,,?



स संपादक शिवाकांत पाठक,,!


 उत्तराखंड में किसान की आत्महत्या से मचा हड़कंप: "करोड़ों की ठगी और पुलिस की बेरुखी" ने ली जान? ⚖️


ऊधमसिंह नगर/देहरादून: देवभूमि से एक बेहद हृदयविदारक खबर सामने आई है। ऊधमसिंह नगर के एक किसान ने जमीन के नाम पर करोड़ों की ठगी और पुलिस द्वारा कार्रवाई न किए जाने से आहत होकर मौत को गले लगा लिया। मरने से पहले किसान ने एक वीडियो जारी कर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।


👉 वीडियो में छलका दर्द: "शिकायत की, पर इंसाफ नहीं मिला"

किसान ने अपने आखिरी वीडियो में दावा किया कि उसके साथ करोड़ों की धोखाधड़ी हुई थी। उसने एसएसपी से लेकर कई बड़े अधिकारियों के चक्कर काटे, लेकिन उसकी फरियाद किसी ने नहीं सुनी। अंततः सिस्टम की बेरुखी से हारकर उसने यह खौफनाक कदम उठा लिया।


👉 कांग्रेस का तीखा हमला: "यह कुशासन की पराकाष्ठा है!"

इस घटना के बाद प्रदेश की राजनीति उबल पड़ी है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता अमरजीत सिंह ने सरकार और पुलिस को घेरते हुए कहा:


"प्रशासन की अनदेखी ने एक अन्नदाता की जान ले ली है। करोड़ों की ठगी की शिकायत के बावजूद पुलिस सोती रही। हम इस मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषी अधिकारियों पर तत्काल एक्शन की मांग करते हैं।"


⚡ मुख्यमंत्री धामी का बड़ा एक्शन: मजिस्ट्रेट जांच के आदेश!

मामले की गंभीरता और जनता के आक्रोश को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तुरंत एक्शन मोड में आए। उन्होंने:


मुख्य सचिव और DGP से घटना की पूरी रिपोर्ट तलब की।


कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत को निष्पक्ष मजिस्ट्रेट जांच के निर्देश दिए हैं।


सीएम ने साफ कहा— "अगर किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई, तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।"


मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है और प्रशासन को हर संभव सहायता देने के निर्देश दिए हैं।


📢 बड़ा सवाल,,???? जो सिस्टम को कचोट रहे हैं:

एक किसान को इंसाफ के लिए जान क्यों देनी पड़ी? क्या करोड़ों की ठगी की शिकायत पर समय रहते एक्शन लेना पुलिस की जिम्मेदारी नहीं थी?


बताइये,,, 👉 आपकी क्या राय है? क्या केवल जांच के आदेश काफी हैं या दोषी अधिकारियों पर तुरंत निलंबन की कार्रवाई होनी चाहिए?


परिजनों और पुलिस के अलग-अलग बयान👇

उन्होंने बताया कि वे लगातार न्याय के लिए पुलिस से गुहार लगाते रहे, लेकिन उनकी बात कहीं भी नहीं सुनी गई। उन्हें यही कहा गया कि उन्हें पैसे दिए जा चुके हैं और अब पुलिस कुछ नहीं कर सकती। वहीं, पुलिस का कहना है कि सुखवंत सिंह काशीपुर का हिस्ट्रीशीटर था और उस पर धोखाधड़ी के लगभग पांच मुकदमे दर्ज थे। प्रारंभिक जांच में सुखवंत सिंह द्वारा आत्महत्या करने का कारण आर्थिक तनाव और कानूनी दबाव माना जा रहा है।


किसान आत्महत्या में कोतवाल, एसआई सस्पेंड : पूरी चौकी लाइन हाजिर, एक साल बाद दर्ज हुआ केस👇


   किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या प्रकरण में एसएसपी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कोतवाल और एक एसआई को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही पूरी चौकी को ही लाइन हाजिर कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने 26 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। बड़ी बात ये है कि जीवित रहते हुए किसान एक साल तक पुलिस के चक्कर काटता रहा, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अब उसकी मौत के बाद केस दर्ज हुआ है।

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