जमीनी सच,,डीलर बनाम नेता जी,,!व्यंग लेख,,स संपादक शिवाकांत पाठक,!
आज के समय में जब कानून मेरी मुट्ठी में की तर्ज मे हो तो पैसे की हनक ऊँचे ख्वाब देखने के लिए मजबूर कर देती है,क्यों की वर्तमान समय में जब क़ोई ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ता है तो फले ही हो किसी एक जातिगत राजनैतिक हो लेकिन उस समय सभी के सामने हाँथ जोड़ना उसकी मज़बूरी बन जाती है,, क्योकि आज साईकिल से चलने वाला यदि चुनाव जीत गया तो लग्जरी गाडी तो पक्का है ही साथ ही सरकार के साथ मिलकर जिंदाबाद कहने में क्या बुराई है,, फायदा ही है,, कितना भी घोटाला करो, जाँच ही नहीं होगी,, ठंडा बस्ता कब क़ाम आएगा,, बस कुछ ऐसा ही मामला देश में चल रहा है, जो ज़मीन में घुस गया,, वो तो केवल सांप ही नहीं हनुमान भी हो सकता है,, क्योकि पाताल में हनुमान जी भी गये थे,, वर्तमान सिस्टम के लिए कुछ कहना जरुरी नहीं है क्यों की जिस राज्य मे ज़मीन को लेकर डी एम, एस डी एम आदि अनादि कार्यवाही के घेरे में आते हो और एच आर डी ए,, फिर भी गंगा की तरह निर्मल पावन होकर ज़मीन में घुसने वालों के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर चल रहा हो तो हर डीलर यही कहेगा चल अकेला, चल अकेला, चल अकेला, तेरा मेला पीछे छूटा राही,,,,ऐसे ही एक डीलर साहब को पूरा शौक अब चुनाव का लड़ने का है क्यों की जमीनी फर्जी वाड़े की जंग वे एच आर डी ए की कृपा से जीत गये,, तो चुनाव भी जीत जायेगा ऐसा उनका मानना है,,,
धोखाधड़ी के लिए नेता जी को बहुत परिश्रम करना पड़ता है। लेकिन पारदर्शिता और स्पष्टता के मामले में उनका कोई हाथ नहीं पकड़ सकता है। अपने इलाके यानि सूर्या नगर में उन्होंने बड़े-बड़े अक्षरों में, मर्यादापूर्वक साफ-साफ लिखवा रखा है कि ‘हम आपकी सेवा में हैं। मतलब आपकी सेवा ही हमारे लिए मेवा है’। स्वाभाविक है कि अघोषित लूटने के अधिकार के तहत मेवा प्राप्ति के आंकड़े आम आदमी के अलावा शासन और राजनीति के सम्मानार्थ सार्वजनिक नहीं किए जा सकते थे ये लाजिमी है। लेकिन फिर भी आम आदमी का तजुरबा इतना पक्का रहा है कि चुनाव होने के दो-चार महीनों में ही वे जान जाते थे कि नेता जी ऊपर से लूट रहे हैं या भीतर से। आगे से लूट रहे हैं कि पीछे से। ऊपर से लूटने वाले जरा भगवान टाइप के नेता होते हैं। एक बार कोई इनके हाथ में आ जाए तो उसकी धोती उतरवाकर बाकायदा उसका अंगोछा बना देते हैं। भीतर से लूटने वाले नेता जरा ‘भगत टाइप’ होते हैं, धोती ऐसे उतरवाते हैं जैसे श्रद्धालू आरती में ताली मार रहा हो। आम आदमी को को ऊपर से लूटने वाले नेता मुफीद पड़ते है, वो धोती उतरवाते समय बड़ी इज्जत के साथ उसका गमछा बनाकर कम से कम थोड़ा बहुत लौटा देते हैं। वे भीतर से लूटने वाले नेता जी की एकदम नंगा करने वाले नहीं होते हैं।

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