अभिमान ईश्वर का भोजन है किसी का भी अभिमान नहीं रहा,,!हरिद्वार!

 


स संपादक शिवाकांत पाठक,


ईश्वर ही सभी का जीवन दाता विनाश कर्ता और पालन कर्ता है यह एक ध्रुव सत्य है,, जीवन में होने वाली प्रत्येक घटनाये ईश्वर के विधान पर निर्धारित होती हैं,, क्यों की गीता में श्री कृष्ण कहते है की जीवन मृत्यु, विजय पराजय,लाभ हानि सब कुछ मेरे द्वारा होता है,,, एक बार एक आदिवासी समुदाय के कर्तव्य निष्ठ व्यक्ति चुनाव लड़ते हैँ,, चुनाव लड़ने से पूर्व वे अपना जीवन के अमूल्य पल जनता के हर वर्ग को देते हैँ उन्हें सभी का सहयोग प्राप्त होता है,, अंततः वे चुनाव जीत जाते हैं,, चुनाव से पूर्व वे सभी की बात सुनते रहे जीतने के बाद उन्होने या चंद लोंगो ने एलान कर दिया की जिसे भी हमारे समूह को छोड़ना है छोड़ दें,, हमको कोई भी जरूरत नहीं है अब किसी की,, हमको तो केवल हमारे समुदाय ने ही सहयोग दिया है,, और समुदाय के दो चार लोग जो कहे वह सुनो बाकी तुम सभी को बोलने का कोई भी हक़ नहीं है,,हालांकि जनसेवा के पीछे एक ऐसे व्यक्ति का विषेस योगदान रहा जिसने जन सेवा की ताकत मन और धन भी दिया लेकिन भाई अब तो पांसा पलट चूका था,, सुग्रीव जब बालि से लड़ने गया तो  उसके पीछे हाँथ राम का था,, और बाली की मृत्यु के बाद सुग्रीव राजा बना लेकिन वह राम को दिए बचनों को भूल गया,, अंततः परिणाम क्या हुआ किसी से छुपा नहीं हैँ,,, अभिमान रावण का हो या फिर सुग्रीव का,, नारद का हो या फिर परशुराम जी का भगवान कभी भी नहीं रखते,,, सदैव याद रखिये,,, 🙏

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