अपने दामन में लगे दाग नजर आते हैं, वक्त इंसान को जब आइना दिखाता है!

 


रिजवान खान (संयुक्त सचिव किसान कांग्रेस उत्तरखंड)




*आप सभी को मालूम है कि चुनाव के समय वे तमाम विकास कार्य किए जाते हैं जो वर्षों से अधूरे पड़े रहते हैं मतलब आप से ज्यादा कौन जानता है अमीर व्यक्ति ने गरीबों का दर्द कब महसूस किया सिर्फ एक उदाहरण बता दें ?*  *आम जनता तो केवल कठपुतली बन कर रह गई है , जनता तो केवल नांच सकती उसे जैसे भी नचाया जाए उस तरह बेबस है नाचने पर जिस समय देस में जी एस टी लागू किया गया तब तमाम प्रदेशों ने विरोध किया था और सरकार का कहना था कि यह आम जनता के लिए नहीं व्यापारियों के लिए है*  *और समझदार लोग जानते थे कि यह सब एक स्कीम के तहत किया जा गया  था  पूजीवादियों के इशारे पर सरा काम किया गया था पीसना जनता को ही था और हुआ भी वही जो आपके सामने है सच तो यह है कि महगांई बेरोजगारी का विरोध करने वाले लोग सत्ता में पहुंच कर उस महगांई बेरोजगारी के संरक्षण दाता बन गए क्यों , महगांई बेरोजगारी की बात करने या जनविरोधी नीतियों का विरोध करने पर राजद्रोह आदि क्या चिंता का विषय नहीं है*?  *अब यदि हम बात करें नैतिकता की तो आई ए एस हो या फिर सांसद, मंत्री आदि क्या ये सब इमानदारी की कसौटी में खरे उतर रहे हैं क्या भ्रष्टाचारी, रिश्वत खोरी , काला धन जमा नहीं है उच्च पद के लोगों के पास* ? *याद रखना जिस दिन ऊंचे पद पर कार्यरत लोगों की वास्तविक संपत्ति की गोपनीय जांच करा दी जाएगी भारत देश से गरीबी सदैव के लिए मिट जाएगी यह एक कड़ुआ सच है काला धन हमारे देश में ही है लेकिन सच से पर्दा हटाएगा कौन* ? *जो खुद ही भ्रष्ट है वह अपनी भ्रष्ट जाति का विनाश क्यों करेगा ? यह एक सोचनीय पहलू है ! भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी , महगांई,बेरोजगारी , तब तक रहेगी जब तक आप कायर रह कर बेजुबान रहेंगे जब विरोध की आग सारे देश में एक जुट होकर अपना अस्तित्व दिखाएंगी वह समय भ्रष्टाचार का अंतिम समय होगा* ,!


नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले आठ वर्षों में सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर के दाम में 585 रुपये की बढ़ोतरी की है और सब्सिडी भी पूरी तरह खत्म कर दी है।



वर्ष 2013-14 में 46,458 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी थी, लेकिन मोदी सरकार ने 2015-16 में घटाकर यह सब्सिडी 18 करोड़ रुपये कर दी और 2016-17 में इसे शून्य कर दिया।


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एक बनिया था 5 रुपए की रोटी बेचता था , उसे रोटी की कीमत बढ़ानी थी लेकिन बिना राजा की अनुमति के कोई भी अपने दाम नहीं बढ़ा सकता था , लिहाजा राजा के पास बनिया पहुंचा , बोला राजा जी मुझे रोटी का दाम 10 करना है , राजा बोला तुम 10 नहीं 30 रुपए करो , बनिया बोला महाराज इससे तो हाहाकार मच जाएगा , राजा बोला इसकी चिंता तुम मत करो , तुम 10 रुपए दाम कर दोगे तो मेरे राजा होने का क्या फायदा , तुम अपना फायदा देखो और 30 रुपए दाम कर दो , अगले दिन बनिये ने रोटी का दाम बढ़ाकर 30 रुपए कर दिया , शहर में हाहाकार मच गया , सभी राजा के पास पहुंचे , बोले महाराज यह बनिया अत्याचार कर रहा है , 5 की रोटी 30 में बेच रहा है , राजा ने अपने सिपाहियों को कहा उस गुस्ताख बनिए को मेरे दरबार में पेश करो , बनिया जैसे ही दरबार में पहुंचा राजा ने गुस्से में कहा , गुस्ताख तेरी यह मजाल तूने बिना मुझसे पूछे कैसे दाम बढ़ा दिया , यह जनता मेरी है तू इन्हें भूखा मारना चाहता है , राजा ने बनिए को आदेश दिया तुम रोटी कल से आधे दाम में बेचोगे , नहीं तो तुम्हारा सर कलम कर दिया जाएगा , राजा का आदेश सुनते ही पूरी जनता ने जोर से बोली .... महाराज की जय हो , महाराज की जय हो , महाराज की जय हो । नतीजा सुनिए .... अगले दिन से 5 की रोटी 15 में बिकने लगी । जनता खुश ... बनिया खुश ... और राजा भी खुश कमेंट में बताएं कहानी कैसी लगी ?

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