आगामी दिनांक 27 मई से लेखपाल एवम कानून गो करेंगे कार्य बहिष्कार,, लेकिन क्यों,,!उत्तराखंड,!
स संपादक शिवाकांत पाठक,,
( पुराने अभिलेख ही महत्वपूर्ण,,लेखपाल आखिर करे तो क्या करे, पुरानी खतौनी लाने की जिम्मेदारी खातेदार की होनी चाहिए,, )
( यदि हम प्राचीनता क़ो भूल जाएँ तो वर्तमान का कोई भी अस्तित्व नहीं रह जाता,साथ ही जहाँ बात बटवारे या हिस्से की हो तो पुरानी खतौनी क़ो लेकर लेखपाल द्वारा दिया गया ज्ञापन किसी हद तक सोचनीय पहलू है,, क्यों जहाँ पुराना नहीं वहां नया हो ही नहीं सकता,, सोचिये खेती की ज़मीन से जुड़े मामले चकबंदी विभाग से ताल्लुक रखते हैं,, और किसी भूल वस यदि किसी सम्बंधित विभागीय अधिकारी ने किसी की कृषि योग्य भूमि क़ो परती, या खाला,, में दर्ज कर दिया और उसके कई लोग हिस्सेदारी रखते हैँ तो लेखपाल के लिए ये टेढ़ी खीर साबित होगी,, क्योकि उसे रिकार्ड रूम जाकर मुआयना करना होगा,, जार्जर कागजातों में लिखी बातें समझना होगा,,, जब ये जिम्मेदारी खातेदार की होनी चाहिए,,)
खतौनी पुनरीक्षण / अद्यतन प्रक्रिया अन्तर्गत खतौनी में खातेदारो / सहखातेदारो के गाटों के क्षेत्र में अंश/हिस्से के क्षेत्रफल का निर्धारण किये जाने के सम्बन्ध में।
राजस्व परिषद देहरादून के पत्र संख्या-4444/VI-40-(II) (2020-21) दिनांक 26 नवम्बर 2024 विषयक दिनांक 18 नवम्बर, 2024 को आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद्, उत्तराखण्ड की अध्यक्षता में खतौनी पुनरीक्षण / अद्यतन प्रक्रिया अन्तर्गत खतौनी में खातेदारों / सह-खातेदारों के गाटों के क्षेत्रफल में अंश/हिस्ते के क्षेत्रफल का निर्धारण किये जाने सम्बन्धी कार्यवाही हेतु उत्तराखण्ड लेखपाल संघ के साथ आहूत बैठक की गई थी जिसमें सर्वसम्मति से यह तय हुआ था कि उक्त जटिल कार्य को सम्पादित करने में समय बद्धता में शिथिलता रहेगी। उक्त के क्रम में राजस्व उप निरीक्षकों द्वारा तत्काल प्रभाव से अंश निर्धारण का कार्य किया जा रहा है। उक्त पत्र दिनांक 18 नवम्बर 2024 के प्रस्तर 2- (IV) के अनुसार नोटिस प्रपत्र 2 व 3 निर्गत नही हो पा रहे है जिससे अंश निर्धारण कार्य सम्पादन में बेहद कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
वर्तमान समय में प्रत्येक जनपद में अंश निर्धारण का कार्य सम्पादित किये जाने हेतु राजस्व उपनिरीक्षकों पर उपजिलाधिकारियों, तहसीलदारों व नायब तहसीलदारों द्वारा अनावश्यक दवाब बनाया जा रहा है जिसके सम्बन्ध में अवगत कराना है कि मैदानी जनपदों में भूमि की खरीद फरोख्त ज्यादा होने से अधिकांश खतौनी खाते संयुक्त और जटिल है जिनमें अंश निर्धारण हेतु जनपद के माल अभिलेखागार से भी पुरानी खतौनिया लानी पड़ेगी और मैदानी जनपदों के जिला माल अभिलेखागार और तहसीलो के रिकॉर्ड रूम में धारित अधिकाश खतौनिया जीर्ण-शीर्ण और कटी-फटी हालत में है तथा पुरानी खतौनिया, इक पेन से लिखी होने से अधिक समय अवधि और नमी व धूल के कारण पठनीय भी नहीं है इस कारण ते यदि लेखपाल जनपद के रिकॉर्ड रूम के पुराने खतौनी अभिलेख को लेकर आएगा और उनको अधिक बार उलटा-पलटा जाएगा तो उक्त पुराना रिकॉर्ड और भी क्षतिग्रस्त हो जाएगा वैसे भी लेखपाल के पास इसके अतिरिक्त भी अन्य महत्वपूर्ण राजकीय कार्यों को समय से पूर्ण करने की जिम्मेदारी भी है। इस समस्या के समाधान हेतु पुराना रिकॉर्ड, खतौनिया लाने की जिम्मेदारी संबंधित खातेदार की होनी चाहिए। लेखपाल पूर्ण मनोयोग से सीमित संसाधनों के साथ अंश निर्धारण / फॉर्मर रजिस्ट्री का कार्य कर रहे है। इसके बावजूद उनपर नियत समय सीमा का दबाव बनाना सर्वथा अनुचित है। दिनांक 01 मई 2025 को राजस्व परिषद द्वारा वर्ष 2025-26 यानि खरीफ 1433 फसली से डिजिटल क्रॉप सर्वे हेतु प्रत्येक लेखपाल क्षेत्र में न्यूनतम 05 राजस्व ग्रामों का अंश निर्धारण पूर्ण करने का प्रमाणपत्र देने का तुगलकी फरमान जारी किया गया है जो कि संसाधनो के अभाव में सम्पादित किया जाना असम्भव है। अतः अंश निर्धारण व फॉर्मर रजिस्ट्री कार्य हेतु पर्याप्त एव समुचित समय सीमा प्रदान किया जाना नितान्त आवश्यक है। इस पत्र के माध्यम से लेखपाल संघ प्रश्नगत समत्त्याओ के निराकरण हेतु वार्ता के लिए तैयार है,!


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