चुनाव आयोग के जुमलों की हकीकत,, शपथ दिलाई 60 लाख को और वोट 43 लाख ने डाले।उत्तराखंड।
स.संपादक शिवाकांत पाठक।
रिपोर्ट शाहिद अहमद,,कहावत है कि खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है,, यही वजह रही जुमले के मौसम में जुमलेबाजी करना क्या गलत है,, चुनाव आयोग ने कहा कि 60 लाख लोगों को मतदान की शपथ दिलाई गई,, काफी धन खर्च हुआ होगा समय भी,, और मेहनत रंग नहीं लाई तो क्या किया जाए,, भाई,,
चुनाव आयोग का राज्य में 75 प्रतिशत मतदान का लक्ष्य रखकर जितनी भी कवायद कीं, उसके बावजूद राज्य 15 साल पीछे चला गया। सोशल मीडिया से लेकर हर बूथ तक पहुंच, शपथ से लेकर कम वोट प्रतिशत वाले बूथों पर विशेष कोशिशें करने के बाद भी मतदान का आंकड़ा 53 प्रतिशत पर अटक गया। अब सर्विस मतदाता, दिव्यांग, बुजुर्ग, कर्मचारियों के मतदान को मिलाकर खुद चुनाव आयोग इस आंकड़े के 55 से 56 प्रतिशत तक रहने का अनुमान जता रहा है।
कवायदें, जो हो गईं नाकाम
60 लाख से अधिक को शपथ : चुनाव आयोग की पूरी टीम ने प्रदेशभर में स्वीप की मदद से विभिन्न गतिविधियां आयोजित कीं। दावा किया कि 60 लाख लोगों को मतदान की शपथ दिलाई गई, लेकिन नतीजा ये रहा कि 83 लाख में से करीब 42 से 43 लाख ही अपना वोट डालने आए।
टिप कमेटियां : चुनाव आयोग ने हर गांव के हर बूथ तक पहुंच बनाने के लिए टर्नआउट इंप्लीमेंटेशन प्लान कमेटी गठित की। राज्य स्तर के अलावा हर जिले में मुख्य विकास अधिकारी को इसका नोडल बनाया गया। उन्हें जिम्मेदारी दी गई कि वह सहकारी समितियों व अन्य के माध्यम से हर बूथ तक मतदाताओं को जागरूक करें, ताकि वह मतदान को बाहर आएं। नतीजा निराशाजनक रहा।
सोशल मीडिया : सोशल मीडिया में चुनाव आयोग ने विशेष प्रयास किए। युवाओं को जागरूक करने के लिए इंस्टाग्राम पर रील की प्रतियोगिता, फेसबुक पर सवालों की क्विज समेत तमाम कवायदें की गईं। ब्रांड एंबेसडर से भी अपील करवाई गई और सोशल मीडिया से मतदाताओं तक भेजी गई। इसका भी असर नजर नहीं आया।
कम वोटिंग बूथों पर अधिक फोकस : चुनाव आयोग ने कम वोटिंग वाले बूथों को खासतौर से चिह्नित किया। यहां मत प्रतिशत बढ़ाने के लिए खुद आयोग के अधिकारी भी मैदान में उतरे। लोगों से मतदान की अपील की लेकिन वह बेअसर रही।

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