एक कबिता ब्राह्मणों बंधुओं के लिए समर्पित।
ब्राम्हण होकर ब्राम्हण का,
आप सभी सम्मान करो!
सभी ब्राम्हण एक हमारे,
मत उसका नुकसान करो!
चाहे ब्राम्हण कोई भी हो,
मत उसका अपमान करो!
जो ग़रीब हो, अपना ब्राम्हण
धन देकर धनवान करो!
हो गरीब ब्राम्हण की बेटी,
मिलकर कन्या दान करो!
अगर लड़े चुनाव ब्राम्हण ,
शत प्रतिशत मतदान करो!
हो बीमार कोई भी ब्राम्हण ,
उसे रक्त का दान करो!
बिन घर के कोई मिले ब्राम्हण ,
उसका खड़ा मकान करो!
अगर ब्राम्हण दिखे भूखा,
भोजन का इंतजाम करो!
अगर ब्राम्हण की हो फाईल,
शीघ्र काम श्रीमान करो!
ब्राम्हण की लटकी हो राशि,
शीघ्र आप भुगतान करो!
ब्राम्हण को अगर कोई सताये,
उसकी आप पहचान करो!
अगर जरूरत हो ब्राम्हण को,
घर जाकर श्रमदान करो!
अगर मुसीबत में हो ब्राम्हण ,
फौरन मदद का काम करो!
अगर ब्राम्हण दिखे वस्त्र बिन,
उसे अंग वस्त्र का दान करो!
अगर ब्राम्हण दिखे उदास,
खुश करने का काम करो!
अगर ब्राम्हण घर पर आये,
जय ब्राम्हण राज बोल सम्मान करो!
अपने से हो बड़ा ब्राम्हण,
उसको आप प्रणाम करो!
हो गरीब ब्राम्हण का बेटा,
उसकी मदद तमाम करो!
बेटा हो गरीब ब्राम्हण का पढ़ता,
कापी पुस्तक दान करो!
जय ब्राम्हण समाज की।
👉🏻 यदि आप ब्राम्हण हैं और यदि आप ब्राम्हण समाज का विकास करना चाहते है तो यह कविता प्रत्येक ब्राम्हण तक पहुंचनी चाहिये ।
🚩🚩जय श्री परशुराम। 🚩🚩🚩
सदैव ध्यान रखें कि ब्राम्हण कोई जाति नहीं वल्कि उपलब्धि हैं क्यों कि जो ब्रम्ह को जनता है वह ब्राम्हण है गोस्वामी तुलसीदास जी लिखते हैं कि, बंदहू प्रथम महीसुर चरणा , अर्थात मैं प्रथ्वी के देवता ब्राम्हणों के चरणों की बंदना करता हूं
सभी ब्रम्हाण बंधुओं से अनुरोध है कि अपने लेख, विचार, कविता, बच्चो के जन्म दिवस के विडियोज, फोटो हमको दिए गए वॉट्सएप नम्बर पर भेजें हम अपने चैनल, न्यूज पेपर, पोर्टल के माध्यम से देश के कोने कोने तक पहुंचाएंगे वह भी निशुल्क कृपया एक बार सेवा का मौका जरूर दें संपर्क वॉट्स ऐप एवम् कालिंग नम्बर 9897145867,



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