समुन्द्र मंथन में निकले 14 रत्नों में एक रत्न है सुरा, वारुणी,, यानी मदिरा !

 


संपादक शिवाकांत पाठक!



हाईवे से एक फुट दूरी नहीं ठीक सड़क के किनारे अंग्रेजी शराब ठेका साथ ही पीछे स्कूल, और वी आई पी लोगो की कालौनी यह सब होते हुए भी बेखौफ संचालित होने पर सवालिया निशान तो होंगे ही लेकिन क्यों जानते हैं आप ? क्या समुन्द्र मंथन के दौरान निकले 14 रत्नों में एक विशेष स्थान वारुणी अर्थात सुरा , मदिरा, का नहीं है देव दानव सभी की प्रिय चीज होने के नाते ही धरम नगरी में मुख्य सड़क की शोभा बढ़ाने में अंग्रेजी शराब ठेके ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है अब बात करते हैं नसे की तो नशा प्राचीन काल से हमारे पूर्वज करते आए हैं नशे के कई रूप होते हैं कहीं न कहीं हर व्यक्ति नसे में रहता है, किसी को पद का , तो किसी को धन का, किसी को  सत्ता का तो किसी को बल या शक्ति का नशा तो किसी को अपनी होसियारी, काबिलियत का नशा , तभी तो फिल्मी गाने में सुना गया कि, नशे में कौन नहीं है ये बताओ जरा ? देखिए ना आपने सुना होगा कि शराब विष के समान है इसको पीने से कैंसर होता है स्वास्थ्य के लिए हानि कारक है , है न ? आप इस रत्न के बिना देश का विकास असम्भव है यानी हमारा अपना  विकास क्यों कि विकास ही विकास का जन्म दाता है जब विकास होता है तो उससे तमाम लोगों का भविष्य तय होता है आप भले ही बात कमीशन पर ले जाएं परन्तु मेरे लिखने का उद्देश्य विकास से संबंधित है , समुन्द्र से विष वारुणी निकली यानी जहर और मदिरा विष का असर तत्काल होना सुनिश्चित था लेकिन मदिरा का उपयोग दवा में भी होना था जैसे बच्चे को सर्दी लग जाए तो देशी शराब की मालिश करते थे हमारे पूर्वज, तो फिर तत्काल प्रभाव तो विष का होना था तो उस विष को भगवान शंकर को दे दिया गया और वे पी भी गए कुछ बूंदे जमीन पर गिर गई तो तमाम जहरीले वृक्ष उग आए ! 


तो फिर शराब पर हल्ला मचाने की क्या जरूरत है यह तो रत्न है और प्रकृति की देन है इसलिए ठेका कहां है, कहां होना चाहिए यह सब कुछ सोचना आपके लिए जरूरी नहीं है आप को तो जहां भी उपलब्ध हो जाए बस झूम बराबर झूम शराबी बाकी क्या फायदा बेवजह टेंशन लेने की !


सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे के 500 मीटर के दायरे में शराब की दुकानें खोलने और बिक्री के लिए लाइसेंस देने पर रोक लगाने के संबंध में निर्देश जारी किया है. कोर्ट ने 20 हजार या उससे कम आबादी वाले स्थानीय निकायों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले क्षेत्रों के मामले में 500 मीटर की दूरी को घटाकर 220 मीटर कर दिया है.👇



सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को दिशानिर्देश जारी किया है. शीर्ष अदालत के आदेशों के अनुसार, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों से समय-समय पर आदेश के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है. इसके अलावा, मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 185 में शराब पीकर गाड़ी चलाने के मामले में कारावास या जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है. मंत्रालय की ओर से शराब पीकर वाहन चलाने के खतरों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से अभियान चलाया जाता रहा है!

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