कहीं आर टी आई का मजाक तो नहीं बना रहा खाद्य आपूर्ति विभाग! हरीद्वार!
स. संपादक शिवाकांत पाठक!
रिपोर्ट मुकेश राणा उत्तराखंड ,आपको बताते चलें कि वर्ष 2005 में सूचना अधिकार अधिनियम एक्ट इसलिए लागू किया गया था ताकि सरकारी तंत्र की पारदर्शिता जनता के बीच स्पष्ट हो सके उपरोक्त सूचना अधिकार अधिनियम की धारा 6 में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि कोई भी व्यक्ति लोक हित में सूचना मांगने का अधिकार रखता है !
15 जून 2005 को इसे अधिनियमित किया गया और पूर्णतया 12 अक्टूबर 2005 को सम्पूर्ण धाराओं के साथ लागू कर दिया गया। सूचना का अधिकार अर्थात राईट टू इन्फाॅरमेशन। सूचना का अधिकार का तात्पर्य है, सूचना पाने का अधिकार, जो सूचना अधिकार कानून लागू करने वाला राष्ट्र अपने नागरिकों को प्रदान करता है। सूचना अधिकार के द्वारा राष्ट्र अपने नागरिकों को, अपने कार्य को और शासन प्रणाली को सार्वजनिक करता है।
कुछ दिन पूर्व नवोदय नगर टिहरी विस्थापित निवासी स. संपादक शिवाकांत पाठक ने सुभाष नगर हरीद्वार स्थित राशन डीलर सोमवती के कोटे में संबद्ध राशन कार्डों की सूची सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त करने हेतु जिला खाद्य आपूर्ति विभाग हरिद्वार से मांगी थी परन्तु उपरोक्त विभाग द्वारा मांगी गई सूचना को यह कह कर टाल दिया कि आवेदक के हस्ताक्षर नहीं हैं अब सोचने वाली बात यह है कि आवेदक ने जब स्वयं आवेदन पत्र लिखा हो तो आवेदक का नाम ही उसके हस्ताक्षर की मान्यता रखते हैं राशन डीलरों द्वारा किए जा रहे घोटालों में संबधित विभाग की अहम भूमिका है इस बात को नकारा नहीं जा सकता ! फिलहाल पारदर्शिता पर लगने वाले प्रश्नचिन्ह को गंभीरता पूर्वक लेते हुए पत्रकारों ने श्रीमान जिलाधिकारी हरीद्वार से स्पष्ट जांच करवाने की सहमति जताई है!





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