धरम नगरी में बेखौफ होकर फल फूल रहा है सट्टे का कारोबार! हरिद्वार!
( पुलिस की रहस्यमई चुप्पी पर बड़ा सवाल)
( कल एस एस पी से मिलेगा युवा संघर्ष दल )
हरिद्वार तीर्थ नगरी में सट्टा पुलिस की नाक के नीचे बड़े पुरेतजोर शोर के साथ किया जा रहा है , सट्टे के इस अवैध काले कारोबार में पुरुषों से लेकर महिलाएं एवं छोटे बच्चे भी इस अवैध काले कारोबार की चपेट में है , शहर में चर्चा यह भी है की पुलिस सब कुछ जानते जानते हुए भी अनजान बनी हुई है , हरिद्वार क्षेत्र में इस काले कारोबार को करने वालों के हौसले इतने बुलंद है कि उनकी रगों में पुलिस का जरा भी खौफ नहीं रहा है , खुलेआम सड़कों पर शाम के समय दुकान लगाकर सब्जी मंडी की तरह इस काले कारोबार को अंजाम दे रहे हैं । लालतारा पुल हरीद्वार के निकट एक झोपड़ी में बेखौफ होकर सट्टे का कारोबार चल रहा है सट्टे के नंबरों को दिन में तीन बार खोला जा रहा है , जिसे खबरों के नाम से जाना जाता है , सट्टा खोलने का समय सुबह 4 बजे को चार वाली खबर , और शाम को 6 बजे वाली खबर तथा रात 10 बजे वाली खबर के नाम से जाना जाता है , हरिद्वार क्षेत्र में कम से कम 30 से 40 सटोरियों के मुंशी हरिद्वार तीर्थ नगरी में सट्टे को अंजाम दे रहे हैं , जिसमे ब्रह्मपुरी , कनखल , ज्वालापुर , रोशनाबाद, रावली महदूद, शिवलोक कॉलोनी व खन्ना नगर और कहीं भी क्षेत्र में शामिल है । क्षेत्र के कुछ लोगों ने नाम न खोलने की शर्त पर बताया है कि इस काले कारोबार को करने वाला कोई और नहीं बल्कि पुलिस व नेता ही मेरवान हो रहे हैं , उनका कहना है । यह सट्टा हरिद्वार क्षेत्र पर इस काले कारोबार को अंजाम दिया जा रहा है , हैरान कर देने वाली बात यह है कि छोटे - छोटे बच्चे भी इसकी चपेट में है , शहर में चर्चा यह भी है की उनके द्वारा ही सट्टा नंबर की पर्ची दी जाती है , पहले कई बार समाचार पत्रों में इस खबर को प्रकाशित किया जा चुका है , सटोरियों का साफ कहना है कि जब उनका पैसा हाईलेवल तक पहुंचता है तो कोई उनका क्या बिगाड़ सकता है , हम जेब में पैसे रखकर कार्य करते है । इतना ही नहीं यह कार्य क्षेत्र में बहुत बड़ी मात्रा में किया जा रहा है , प्रशासन द्वारा इस पर लगाम नहीं कसी गई तो बर्बादी के कगार पर होंगे लाखों परिवार , इस लत की वजह से यहां तक देखा गया है कि कितने ही परिवारों को भूखे पेट गुजारनी पढ़ती हैं , दिन भर खून पसीने की कमाई को शाम को दे देता है खाईबड़ा में , जिसके परिणाम यह होते है कि छोटे - छोटे बच्चों को रहना पड़ता है भूखे पेट ।

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