महाशक्ति देवी की पूजा के बाद किस तरह मांगे क्षमा?

 


पंडित शिवाकांत पाठक !




( यश्य यश्य नारियष्य पूज्यंते रमंते तत्र देवता )


 श्रष्टि के निर्माण से लेकर विनाश तक अपनी शक्ति का चमत्कार दिखलाने वाली आदि शक्ति जिसे, दुर्गा, काली, लक्ष्मी, महाकाली




, सरस्वती, मां तुलसी आदि विभिन्न नामों से जाना जाता है वही शक्ति नारी के रूप में भी श्रष्टि को चला रही है उसकी उपासना पूजा अर्चना करने के उपरांत क्षमा अवश्य मांगे खी कि जिसे सारे देवता मां कहकर पुकारते हैं उस परम शक्ति की पूजा विधि हो सकता है आप ना जानते हों इसलिए क्षमा अवश्य मांगे , वह करुणामयी मां अवश्य क्षमा करतीं हैं 👇



ॐ अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।

दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि।।१।।


आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।

पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरि।।२।।


मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि।

यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे।।।३।।


अपराधशतं कृत्वा जगदम्बेति चोच्चरेत् ।

यां गतिं समवाप्नोति न तां ब्रह्मादयः सुराः ।। ४।।


सापराधोऽस्मि शरणं प्राप्तस्त्वां जगदम्बिके ।

इदानीमनुकम्प्योऽहं यथेच्छसि तथा कुरु ।। ५।।


अज्ञानाद्विस्मृतेर्भ्रोन्त्या यन्न्यूनमधिकं कृतम् ।

तत्सर्वं क्षम्यतां देवि प्रसीद परमेश्वरि ।। ६।।


कामेश्वरि जगन्मातः सच्चिदानन्दविग्रहे ।

गृहाणार्चामिमां प्रीत्या प्रसीद परमेश्वरि ।। ७।।


गुह्यातिगुह्यगोप्त्री त्वं गृहाणास्मत्कृतं जपम्।

सिद्धिर्भवतु मे देवि त्वत्प्रसात्सुरेश्वरि।।८।।


दुर्गा क्षमा प्रार्थना हिंदी अर्थ 👇


 परमेश्वरि ! मेरे द्वारा रात - दिन सहस्रों ( हजारों ) अपराध होते रहते हैं । ' यह मेरा दास है ' - यों समझकर मेरे उन अपराधों को तुम कृपापूर्वक क्षमा करो । 1 ।



 परमेश्वरि ! मैं आवाहन नहीं जानता , विसर्जन नहीं जानता तथा पूज करने का ढंग भी नहीं जानता । क्षमा करो ।2 । 




देवि ! सुरेश्वरि ! मैंने जो मन्त्रहीन , क्रियाहीन और भक्तिहीन पूजन किया है , वह सब आपकी कृपा से पूर्ण हो । (3)


 सैकड़ों अपराध करके भी जो तुम्हारी शरण में जाकर ' जगदम्ब ' पुकारता है , उसे वह गति प्राप्त होती है जो ब्रह्मादि देवताओं के लिए भी सुलभ नहीं है | 4 |



देवि ! परमेश्वरि ! अज्ञान से , भूल से अथवा बुद्धि भ्रांत होने के कारण मैंने जो न्यूनता या अधिकता कर दी हो , वह सब क्षमा करो और प्रसन्न होओ !5!




 सच्चिदानंदरूपा परमेश्वरि ! जगन्माता कामेश्वरि ! तुम प्रेम पूर्वक मेरी यह पूजा स्वीकार करो और मुझ पर प्रसन्न रहो ।6!





 देवि ! सुरेश्वरि ! तुम गोपनीय से भी गोपनीय वस्तु की रक्षा करने वाली हो । मेरे निवेदन किये हुए इस जप को ग्रहण करो । तुम्हारी कृपा से मुझे सिद्धि प्राप्त हो ।7 ।


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