पत्रकार योग कल्याण समिति द्वारा एक पहल करें योग रहें निरोग!योगाचार्य संगीता सिंह गोल्ड मेडलिस्ट !

 


संपादक शिवाकांत पाठक!


 ( सेतुबंध आसन )



इस आसन में शरीर की आकृति एक सेतु पुल सामान बनने से इसे सेतुबंध आसन कहा गया है इसे कंधार आसान भी कहा जाता है विधि ...सर्वप्रथम आसन पर पीठ के वल लेट जाएं एडी पंजे मिले भुजाएं शरीर के साथ दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ते मोड़ते हुए ऐडियो को नितंबों के पास लाना है दोनों हाथों से पैरों की टेक्नो को पकड़ ले श्वास भरते हुए धीरे-धीरे अपने नितंब और धड़ को ऊपर की ओर उठाएं कंधे व सर पृथ्वी पर हो स्वास सामान्य करते हुए पूरी स्थिति में समर्थ के अनुसार रुक स्वास निकलते हुए पूर्व स्थिति में आए स्वास को ढीला कर  शवआसान में विश्राम  करें 

लाभ.. साइटिका व पीठ दर्द को ठीक करने में सहायक कंधे भुजाएं अंग संगठित बनते हैं जनगांव व नितंबों के पास जमी चर्बी कम होती है पाचन व निष्कासन क्रिया सहज बनती है रीड लचीली बनती है 

ब्रोंकाइटिस व थायराइड के दोष दूर होते हैं निषेध हर्निया व अल्सर के रोगी इस आसन को ना करें !



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