युवाओं में शक्ति संचार का एक मात्र माध्यम हैं वीर हनुमान,!स संपादक शिवाकांत पाठक,!
समान्यत: आज सभी लोग एक जैसे रहते हैँ भेष भूषा रहन सहन में अचानक बदलाव की स्थिति नहीं आती, लेकिन बाल ब्रम्हचारी हनुमान जी महान ज्ञानियों की श्रेणी मे गिने जाते हैँ,, जिन्होंने अपना सारा जीवन सिर्फ राम की सेवा में समर्पित कर दिया,, रामायण में एक चौपाई आती है,,
राम काज कीन्हे बिना मोहि कहाँ विश्राम,
अर्थात,, राम जी का कार्य बिना किये वे विश्राम यानि आराम भी नहीं करना चाहते,, तभी तो राम जो कि अखिल ब्रम्हांड के नायक हैँ फिर भी कहते है,,,
हे हनुमान,, तुम मम प्रिय भरत सम भाई,,
अर्थात तुम मुझे भरत की तरह प्रिय हो,, मतलब साफ है की प्रभु राम भरत को बहुत ज्यादा प्रेम करते थे,, क्योकि ईश्वर समर्पण चाहता है आडम्बर या नाटक नहीं,, और भरत जी भक्ति का जीता जागता प्रमाण हैँ,, जिन्होंने अपने भाई राम के लिए राज्य को ठुकरा दिया और स्वयं वन को उन्हें मनाने चल पड़े,,
यहाँ हनुमान जी जब माँ सीता से मिले तो छोटे से बन गये,, जब लंका दहन किया तो विकराल रूप में दिखे, और असुरो यानि राक्षसों का विनाश करते समय महा बली बन जाते हैँ,,
सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा, विकट रूप धरि लंक जरावा,, भीम रूप धरि असुर संघारे,,,
हनुमानजी ने विप्र रूप धारण करके मधुर वाणी में श्रीरामनाम सुमिरन करना प्रारम्भ कर दिया जिसे सुनते ही विभीषणजी को लगा कि उनके कानों में अमृत सा घुलने लगा । उन्होंने अपने चारों तरफ देखा तो एक विप्र (ब्राह्मण) दिखाई आया जो लगातार तन्मय भाव से प्रभु श्रीराम के गुणगान गुनगुना रहा था जिसे सुनते-सुनते भाव विहोर विभीषणजी उनके पास आये व उन्हें सादर प्रणाम किया और हाथ जोड़कर पूंछने लगे कि हे विप्रवर आप लँका में कैसे आये, आपका कोई हरण कर लाया है क्या, विप्रवर आप कुशल से तो हो । हे विप्रवर मुझे आपकी चिंता हो रही है, पहले आप अपनी कथा सुनाओ क्योंकि भगवान भी स्वयं से अधिक भक्तों की चिंता करते हैं, अतः अगर आप गलती से लँका में आ गए हैं तो आप बताएं ताकि रावण के जागने से पहले मैं आपको लँका के बाहर सुरक्षित पहुंचा आऊं ।।
आपको राम राम जी🙏।।

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