अपराध जगत की लंका को जलाने वाले आई पी एस अजय सिंह की खूबियां! हरिद्वार!
संपादक शिवाकांत पाठक!
हमारे शास्त्रों में वर्णित है मनस: वाच: कर्मण: अर्थात जो मन में या विचारों में होता है वह वचनों में अवश्य आता है,, और जो वचनों में होता है वह कर्मो में परिणित अवश्य होता है,, यानि कि यह नियम सभी पर लागू होता है,, जब हम किसी की खूबियां देखते हैं तो यह एक गुण विशेष महत्व रखता है,, यहां हम आपको बताते चलें कि आई पी एस अजय सिंह द्वारा संचालित तमाम अभियान सफलता की मिशाल साबित हुऐ ,क्यों कि धरम नगरी में हो रहे अन्याय अत्याचारों को प्रकृति कब तक सहती , और आपको बता दें कि प्रकृति अपना संतुलन स्वयं बनाती है , प्रकृति ईश्वर की ही शक्ति से उत्पन्न है,, साथ ही यह भी सत्य है कि बिना ईश्वर की इक्षा के पत्ता भी नहीं हिल सकता ,, तो फिर धरम नगरी में आई पी एस अजय सिंह द्वारा चार्ज संभालना,, माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा यह निर्णय लिया जाना भी प्रभु की इक्षा का एक अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है,,
चौपाई
सुनु खगेस नहिं कछु रिषि दूषन। उर प्रेरक रघुबंस बिभूषन॥
कृपासिंधु मुनि मति करि भोरी। लीन्ही प्रेम परिच्छा मोरी॥1॥
भावार्थ
(काकभुशुण्डि जी ने कहा-) हे पक्षीराज गरुड़ जी! रघुवंश के विभूषण श्री राम जी ही सबके हृदय में प्रेरणा करने वाले हैं। वे जैसा चाहते वैसा ही होता है,,,,,
अभिमान रहित, सरल स्वभाव के धनी, विराट संकल्प शक्ति रखने वाले आई पी एस अजय सिंह ने धरम नगरी की बागडोर संभालते ही एक ऐसा इतिहास रचा जिसे आम जन मानस कभी भूल नहीं सकता,, नशा मुक्ति अभियान,, सत्यापन अभियान, अपराधियो, वारांटीयों का धर पकड़ अभियान,, साइबर सुरक्षा हेतु स्कूलों में जागरूकता अभियान,, दैवीय आपदा पर कटे हुए वृक्षों को सड़क से हटाने के निर्देष, घटनाओं का चंद समय में आश्चर्यजनक रूप से पर्दाफाश करने के शख्त निर्देशों आदि के साथ साथ, घटना होने पर घटना स्थल पर पलक झपकते ही पहुंच जाना आदि मौजूद खूबियां साधारण इंशानों में नहीं होती,,
हां यह बात भी सत्य है कि सत्य के मार्ग पर चलने वाले के समक्ष तमाम तरह की बाधाएं आती हैं जैसे कि हनुमान जी के समक्ष उपस्थित बाधाएं उदाहरण के रुप में सामने आतीं हैं ,, मां सीता रूपी सत्य की खोज में जानें वाले हनुमान को रास्ते में सुरसा, के साथ साथ तमाम मायावी शक्तियों का सामना करना पड़ता है,, लेकिन सभी बाधाओं को पार कर अपने लक्ष को पाने की कोशिशें करने वाले के साथ ईश्वर होता है,, कुछ ऐसा ही आई पी एस अजय सिंह जी के समक्ष उपस्थित हुआ, लेकिन उन्हे हनुमान जी की तरह उनके लक्ष से कोई भी भटका नहीं सका, क्यो कि गौर करें,,,
हनूमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रनाम।
राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम॥1॥
भावार्थ:-हनुमान्जी ने उसे हाथ से छू दिया, फिर प्रणाम करके कहा- भाई! श्री रामचंद्रजी का काम किए बिना मुझे विश्राम कहाँ?॥1॥
जिम्मेदारी के पद पर आसीन अधिकारीयों का प्रारब्ध वास्तव में सत्य कर्मों से जुड़ा होता है तभी इस जन्म में उन्हें विशेष महत्व पूर्ण पद प्राप्त होता है,, यही विधि का विधान है,!


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