कौन कहता है हवा तेज है ज़माने की,,,,
जलाने वाले जलाते ही हैं दीपक घर में
कौन कहता है हवा तेज़ है ज़माने की,,
न किसी दोस्त ना ही अजनबी से निकलेगा,,,
चुभा जो पाँव में काँटा हमीं से निकलेगा,,,
अब तो आदत सी बन गईं है दर्द सहने की,,
जबसे जिद ठान ली सबने हमें सताने की,,,
कौन कहता है हवा तेज़ है ज़माने की,,,
हम सदा सबके लिए जीते रहे,,
जहर के घूँट भी हम पीते रहे,,,
वजह क्या थी हमें सताने की,,,
कौन कहता है हवा तेज़ है ज़माने की,,,
आंधियाँ तेज थीं पर मैं सदा जलता ही रहा,,,
सत्य की राह पर भी हर समय चलता ही रहा,,,
कोसिसे क्यों हुईं बुझाने की,,
कौन कहता है हवा तेज़ है ज़माने की,,,
आपका अपना सभासद प्रत्याशी
दीपक नौटियाल
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