आखिर बुद्धिमान कौन है जनता या नेता ? स. संपादक शिवाकांत पाठक!

 






मैं सर्व प्रथम हिंदुस्तान के सभी पढ़े लिखे बेवकूफ व अनपढ़ मेहनत मजदूरी करने वाले लोगों को कोटि कोटि प्रणाम करता हूं , व संविधान को शत शत कोटि कोटि नमन करता हूं जिसने गरीब अमीर सभी को बराबर सम्मान दिलाया अनपढ़ व पढ़े लिखे डिग्रीधारी लोगों को सही स्थान दिलाया आज पुन: कोटि कोटि नमन करता हूं ! जिन वीर सपूतों ने भारत की आजादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए उनको शायद मालूम ही नहीं था कि आने वाले समय में देश उस रास्ते पर खड़ा हो जाएगा जहां पर गरीबों की भी किस्में पूछी जाएंगी यानी किस तरह का गरीब है? अल्प संख्यक, अनुसूचित जाति या जनजाति, या सामान्य  ? यहां सामान्य का अर्थ साधारण है जिसका कोई विशेष महत्व ना हो  चलो इस बात को यहीं पर समाप्त करते हैं और बात करते हैं काबलियत की तो छोटी सी चपरासी की नौकरी के लिए आपको शैक्षिक योग्यता की जरूरत पड़ती होगी ? और उसकी सैलरी बामुश्किल 30,000 के आसपास होगी बस, लेकिन जिनके झांसे में आकर आप जिन अनपढ़ लोगों को विधायक व सांसद बनाते हैं उनकी सैलरी क्या है व सैलरी के अलावा उनकी कमीसन बाजी को छोड़ कर कितनी सरकारी आय है आप नहीं जानते ! आज तक किसी भी पढ़े लिखे डिग्रीधारी लोगों ने इस मुद्दे को नहीं उठाया क्यों ? हम विदेशों में जमा काले धन की बात करते हैं जबकि हमारे भारत में अधिकारियों व नेताओं के यहां काले धन का भंडार है फिर जांच क्यों नहीं होती ? जानते हैं आप की आखिर भारत के बुद्धिमान लोगों ने यह आवाज क्यों नहीं उठाई  क्योंकि अब हम एक होकर भी भिन्न हो चुके हैं अब हम इंसान नहीं रहे , अब हम सियासत द्वारा बांट दिए गए हैं तमाम जातियों, धर्मो, पार्टियों में हम बट चुके हैं एक दूसरे के विरोधी हो चुके हैं हम , अपने ही देश में अपनों के बीच दरार डालने वालों की चाल में फंस गए हैं हम , कितना भी जुल्म हो हम पर हम एक दूसरे के साथ खड़े नहीं हो सकते तमाम कानून नियमों की धज्जियां उड़ती हुई देखने के आदी हो चुके हैं हम! अब चर्चा करते हैं उनकी जिन सांसदों को आपने उनके द्वारा किए वादों पर जिताया लेकिन जनता से झूठे वादे करने वालों के खिलाफ पढ़े लिखे  वकील वायलिस्टर आदि ने कोई भी सवाल खड़ा नहीं किया !ऐसे में जब संसद आज चर्चा कर रही है तब सभी देशवासी के मन में यह विचार आता है कि आखिर देश के सांसदों को कितना वेतन मिलता है, उन्हें कितना भत्ता मिलता है.


यह सबको मालूम है कि लोकतांत्रिक देश में कानून बनाने का अधिकार संसद को है और संसद अपने सांसदों के दम पर यह काम करती है. लोकतंत्र की यही खूबसूरती है कि सांसद जनता द्वारा चुने जाते हैं और इस प्रकार जनता अपने लिए कानून बनाती है. सांसदों का काम जनता की सेवा करना है और अकसर समाजसेवा में कुछ मिलता नहीं है. केवल समाज की सेवा और समाज का मार्गदर्शन ही उनका काम रहा है. लेकिन सांसदों को कई बार आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा और ऐसे में संसद ने सांसदों का वेतन और जरूरत के हिसाब से भत्ते तय किए. 


आइए जानते हैं सांसदों को कितना वेतन और भत्ता मिलता है


लोकसभा और राज्यसभा के सांसद कार्यकाल के दौरान 50 हजार रुपये का वेतन मिलता है.

अगर सांसद की कार्यवाही के दौरान उसमें शामिल होते हैं, और रजिस्टर में हस्ताक्षर करते हैं तो उन्हें 2000 रुपये हर रोज का भत्ता मिलता है.

एक सांसद अपने क्षेत्र में कार्य कराने के लिए 45000 रुपये प्रतिमाह भत्ता पाने का हकदार होता है.

कार्यालयीन खर्चों के लिए एक सांसद को 45000 रुपये प्रतिमाह मिलता है. इसमें से वह 15 हजार रुपये स्टेशनरी पर खर्च कर सकता है. इसके अलावा अपने सहायक रखने पर सांसद 30 हजार रुपये खर्च कर सकता है.

सांसद निधि (मेंबर ऑफ पार्लियामेंट लोकल एरिया डेवलपमेंट) स्कीम के तहत सांसद अपने क्षेत्र में 5 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का खर्च करने की सिफारिश कर सकता है.

सांसदों को हर तीन महीने में 50 हजार रुपये यानी करीब 600 रुपये रोज घर के कपड़े धुलवाने के लिए मिलते हैं.

सांसदोंको हवाई यात्रा का 25 प्रतिशत ही देना पड़ता है. इस छूट के साथ एक सांसद सालभर में 34 हवाई यात्राएं कर सकता है. यह सुविधा पति/पत्नी दोनों के लिए है.

ट्रेन में सांसद फर्स्ट क्लास एसी में अहस्तांतरणीय टिकट पर यात्रा कर सकता है. उन्हें एक विशेष पास दिया जाता है.

एक सांसद को सड़क मार्ग से यात्रा करने पर 16 रुपये प्रतिकिलोमीटर यात्रा भत्ता मिलता है !राज्य


विधायक की सैलरी एवं भत्ते


 1. तेलंगाना


 2.50 लाख


 2. दिल्ली


 2.10 लाख


 3. उत्तर प्रदेश


 1.87 लाख


 4. महाराष्ट्र


 1.70 लाख


 5. जम्मू & कश्मीर


 1.60 लाख


 6. उत्तराखंड


 1.60 लाख


 7. आन्ध्र प्रदेश


 1.30 लाख


 8. हिमाचल प्रदेश


 1.25 लाख


 9. राजस्थान


 1.25 लाख


 10. गोवा


 1.17 लाख


 11. हरियाणा


 1.15 लाख


 12. पंजाब


 1.14 लाख


 13. झारखण्ड


 1.11 लाख


 14. मध्य प्रदेश


 2.10 लाख


 15. छत्तीसगढ़


 1.10 लाख


 16. बिहार


 1.14 लाख


 17. पश्चिम बंगाल


 1.13 लाख


 18. तमिलनाडु


 1.05 लाख


 19. कर्नाटक


 98 हजार


 20. सिक्किम


 86.5 हजार


 21. केरल


 70  हजार


 22. गुजरात


 65 हजार


 23. ओडिशा


 62 हजार


 24. मेघालय


 59 हजार


 25. पुदुचेरी


 50 हजार


 26. अरुणाचल प्रदेश


 49 हजार


 27. मिजोरम


 47 हजार


 28. असम


 42  हजार


 29. मणिपुर


 37 हजार


 30. नागालैंड


 36 हजार


 31. त्रिपुरा


 34 हजार


नोट: विधायक की सैलरी एवं भत्ते राज्य में अलग-अलग हो सकते हैं और वर्तमान में उपरोक्त दी गई सैलरी में बदलाव हो सकते हैं.

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