इबादत करना सिखाता है रमजान का महिना। सद्दाम खान रोशनाबाद हरिद्वार।

 



स.संपादक शिवाकांत पाठक।



रोजा के बहुत कड़े नियम होते हैं और रोजा रखने वाले दिनभर पानी भी नहीं पीते. सुबह सूरज उगने से पहले सहरी की जाती है और रात को सूर्य ढलने के बाद इफ्तार करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर क्यों रखा जाता है रोजा और कब शुरू हुई रोजा रखने की परंपरा?


रमजान में क्यों रखा जाता है रोजा

रमजान रहमत और बरकतों का महीना है. इस पूरे माह लोग अल्लाह की इबादत करते हैं और नेकी करते हैं. इस्लामिक कैलेंडर के नौंवे महीने में रमजान शुरू होते हैं और 29 या 30 दिनों तक रहते हैं. जिसके बाद ईद मनाई जाती है. रमजान के दिनों की गिनती ईद के चांद पर निर्भर होती है. इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार रमजान ‘रम’ से बना है और इसका मतलब होता है जला देना. यानि रमजान के महीने में लोग अपने भीतर की बुराई व नफरत को जला देते हैं. कहते हैं कि 20 रकात की नामजे तराफी कुरान शरीफ इसी महीने में नाजीर हुई. इसलिए लोग रोजा रखकर पूरे महीने खुदा की इबादत करते हैं.

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