आज का फितरती इंसान,,,,,

 


परिंदे भी बुलाने पर नहीं अब पास आते हैं।


फितरती हो गया है आदमी वे जान जाते हैं।।


जो दिखता है सभी को वो असल में वो नहीं होता।


हैं कुछ ही लोग जो चेहरा देख कर पहचान जाते हैं।।


फितरती हो गया है आदमी वे जान जाते हैं।।


सड़क कल ही बनी थी हां मगर किसने बनाई थी,,?


वो जब टूटी तो सब उसको हकीकत मान जाते हैं।।


फितरती हो गया है आदमी वे जान जाते हैं।।



मुखौटा जो लगा कर घूमते दिन रात सड़को पर।


सुना इस दौर में वो लोग ही सम्मान पाते हैं।।


परिंदे भी बुलाने पर नहीं अब पास आते हैं।


फितरती हो गया है आदमी वे जान जाते हैं।।


स्वरचित मौलिक रचना


स.संपादक शिवाकांत पाठक।


वी एस इंडिया न्यूज चैनल दैनिक विचार सूचक समाचार पत्र सूचना एवम प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त परिवार हरिद्वार उत्तराखंड

संपर्क सूत्र 📲9897145867🙏

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