ब्राह्मणों के अस्तित्व पर खतरा खुद ब्राम्हण या सरकारें ? संपादक शिवाकांत पाठक!

 




शायद आज के भारत में ब्राह्मण होना 1930 के जर्मनी में यहूदी होने जैसा है। यहूदी जर्मनी की आबादी का एक बहुत छोटा हिस्सा थे, फिर भी जर्मनी की लगभग सभी समस्याओं के लिए दोषी ठहराया गया था। शायद पिछले दो/तीन दशकों से, भारत ऐसी ही चीजों का अनुभव कर रहा है। सार्वजनिक रूप से यह विश्वास किया जाता है कि, ब्राह्मण देश की विभिन्न सामाजिक समस्याओं का कारण हैं, जब कि वे जनसंख्या में बहुत कम हैं । हालांकि ब्राह्मण अमीर या शक्तिशाली नहीं हैं अपने तमाम पुस्तकों में पढ़ा भी होगा एक गरीब ब्राह्मण था !  क्यों कि ब्राम्हण ने भले ही विश्व की शांति के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया हो लेकिन अपनी ब्राम्हण समाज के लिए कभी भी कुछ नहीं किया केवल एक दूसरे की मदद करने की बजाय उसे अपने वैभव शाली होने या पद का एहसास दिलाते हुए अपनी ही ब्राम्हण समाज की काट की है जैसे लोहा लोहे को काटता है यदि कोई ब्राम्हण अमीर या विशेष पद पर आसीन ब्राम्हण से याचना या निवेदन करता है तो वह उसके जवाब में उसके विरूद्ध निर्णय लेने में पूरी शक्ति लगा देता है कि कैसे  इस निवेदन करने वाले का नुकसान हो  और वह अपनी इस बुद्धि पर गुमान भी करता है धिक्कार है  ऐसी बुद्धि पर  जिसने  भाई चारा व अपनी समाज को ही  अपना शिकार बना दिया जिसका उदाहरण आप देख रहे हैं कई गरीब पुजारी हैं जो शादी जैसे धार्मिक समारोहों द्वारा संस्कारों व ज्ञान  से  कमाते हैं। ब्राह्मणों के पास कोई आरक्षण नहीं है ना ही कभी रहा है और न ही उन्हें सरकार द्वारा कोई विशेष सब्सिडी दी जाती है।बौद्धिक और प्रगतिशील समूह के ठेकेदार आम तौर पर उन्हें हर चीज के लिए दोषी मानते  हैं। 



केरल के एक ब्राह्मण आदि शंकराचार्य ने अपनी इच्छा शक्ति, बुद्धिमत्ता, परिश्रम और वाद-विवाद शक्ति से वैदिक धर्म को पुनर्जीवित किया।ब्राह्मण वे व्यक्ति हैं, जिन्होंने पिछले 1000 वर्षों के दौरान वेद, उपनिषद, ब्रह्म सूत्र, भगवत गीता आदि का ज्ञान बचाया। 

आम तौर पर, ब्राह्मणों ने संस्कृत भाषा और भारतीय संस्कृति को जीवित रखा। अन्यथा दुनिया की अन्य सभी प्राचीन भाषाएँ और संस्कृति नष्ट हो गईं जहाँ भी  सत्रहवीं सदी में, जिसने बड़े हिंदू साम्राज्य की स्थापना की वह एक ब्राह्मण (बाजीराव पेशवा) था।ब्राह्मण वे कड़ी हैं, जो हमें प्राचीन वैदिक सभ्यता से जोड़ते हैं। शायद, वैदिक सभ्यता फारसी, ग्रीक, मिस्र, रोमन और कई अन्य सभ्यताओं की तरह मर गई होती, अगर ब्राह्मण नहीं होते।

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