आंतरिक सुरक्षा की सुरक्षा खतरे में , दरोगा ने की खुदकुशी! संपादक शिवाकांत पाठक!

 


लखनऊ( उ. प्र)। 

जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी!

सो नृपु आवसि नरक अधिकारी!!




 

गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरित मानस में लिखा तो सच फिर इसमें अविश्वास को स्थान देना उचित नहीं होगा !


वहीं आचार्य चाणक्य ने लिखा कि जनता के सुख में ही राजा या शासक का सुख है राजा को जो अच्छा लगे उसे वह अपना हित ना समझे  अपितु जो प्रजा के हित में हो उसे ही अपना हित समझे ! अब जवाब आप दें वर्तमान समय की स्थित को देखते हुए?



 हमारे देश में यह घटना पहली नहीं है ना ही भूल वस हम इसे अंतिम घटना कह सकते इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी है लेकिन यहां अपनी अपनी ढपली अपना अपना राग अलापने वालों को कानून के रखवालों की चिंता क्यों होगी क्या एक जिम्मेदार पुलिस का कोई जवान या फिर दरोगा जिनपर देश की आंतरिक सुरक्षा की अहम जिम्मेदारी होती है ,आत्महत्या करें तो उसके पीछे छुपी सच्चाई को जानने की कोशिश हमारा सिस्टम नहीं कर सकता या फिर ? या फिर सिस्टम में ही कहीं खराबी है जहां की अपने परिवार व गांव का त्याग कर वर्दी की शान के लिए अपना जीवन समर्पित करने वालों की मौत  के पीछे छिपी सच्चाई को भी जानने व उनको सार्वजनिक कर उन कारणों को समाप्त करने के उपाय नहीं करते कोई ना कोई खास वजह ही रही होगी खाकी बर्दी  कभी भी खुदकुशी नहीं कर सकती  ?उन  उत्तर प्रदेश की विधान सभा के बाहर विधान सभा सत्र की डियूटी मे तैनात 53 वर्षीय उपनिरीक्षक ने गुरूवार की दोपहर अति सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्र हज़रतगंज मे स्थित विधान सभा के गेट नम्बर 7 के पास वाहन पार्किग मे अपनी सर्विस रिवाल्वर से खुद  को गोली मार कर आत्महत्या कर ली। विधान सभा के पास दरोगा द्वारा खुद को गोली मार कर आत्महत्या किए जाने की सूचना के बाद पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर मौके पर पहुॅचे ।



पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर के अनुसार आत्महत्या करने वाले उपनिरीक्षक की जेब से माननीय मुख्यमंत्री के नाम सम्बोधित सुसाईट नोट मिला है जिसमे उन्होने लिखा है कि वो बीमार है उनके बाद उनके बच्चो का खयाल रख्खा जाए। गोली मार कर आत्महत्या करने वाले उप निरीक्षक निर्मल कुमार चौबे मूल रूप से चोलापुर वाराणसी के रहने वाले है और वो अपने परिवार के साथ लखनऊ के चिन्हट क्षेत्र मे रहते थे। उपनिरीक्षक की जेब से मिले सुसाईड नोट के अनुसार वो किसी बीमारी से ग्रसित थे लेकिन बीमारी से ग्रसित होकर आत्महत्या जैसा कदम उठाया वो भी विधान सभा सत्र की डियूटी के दौरान विधान सभा के पास ये अपने आप मे बड़ी बात है। विधान सभा के पास पार्किग मे वर्दीधारी दरोगा द्वारा गोली मार कर आत्महत्या किए जाने की खबर के बाद पुलिस महकमे मे भी हड़कम्प मच गया हालाकि इस खबर के बाद पुलिस महकमे मे शोक की लहर भी दौड़ गई । हालाकि दरोगा की जेब से मिले सुसाईड नोट की जाॅच के बाद ही ये स्पष्ट होगा कि सुसाईड नोट मे लिखी गई आत्महत्या की वजह कहा तक सही है लेकिन दरोगा द्वारा डियूटी के दौरान गोली मार कर आत्महत्या करना ये सवाल भी खड़े कर रहा है कि पुलिस कर्मियो मे तनाव की मात्रा मौजूद है अगर आत्महत्या करने वाला दरोगा बीमार था तो क्या उसे छुटटी नही मिल रही थी या मामला कुछ और है। बाहरहाल मामला कुछ भी हो लेकिन दरोगा द्वारा डियूटी के दौरान आत्महत्या किए जाने की घटना दुखद है।

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