मानहानि कानून और इसकी सजा क्या है!एडवोकेट सचिन कुमार पूर्व कोषाध्यक्ष (जिला बार काउंसिल हरिद्वार एवं जिला प्रवक्ता आम आदमी पार्टी)

 रिपोर्ट मुकेश राणा!


स. संपादक शिवाकांत पाठक!


बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है, जो भारत के संविधान द्वारा प्रत्येक भारतीय नागरिक को दिया जाता है। संविधान के अनुच्छेद 19 (1) के तहत यह मौलिक अधिकार हमें अन्य व्यक्तियों के समक्ष अपने विचार और राय व्यक्त करने की स्वतंत्रता देता है।


यह मौलिक अधिकार, दूसरे अधिकारों की तरह एकपक्षीय नहीं हो सकता है, इसीलिए यह कुछ प्रतिबंधों से घिरा हुआ है, जो संविधान के अनुच्छेद 19 (2) के तहत उल्लिखित हैं। इस तरह के प्रतिबंध उन मामलों में लगाए जाते हैं, जहां कोई भी स्टेटमेंट देश के लिए हानिकारक या किसी की मानहानि की प्रकृति के होते हैं। मानहानि का कानून लगाने के लिए यह सुनिश्चित किया जाता है, कि दूसरों की प्रतिष्ठा को नष्ट करने के लिए गलत स्टेटमेंट नहीं दिए गए हैं।

 


मानहानि का मतलब क्या है?

मानहानि किसी व्यक्ति के चरित्र, प्रतिष्ठा या ख्याति को गलत या दुर्भावनापूर्ण स्टेटमेंट प्रकाशित करके ठेस पहुंचाने की क्रिया है। भारत में, मानहानि एक नागरिक गलत के साथ-साथ एक आपराधिक रूप से अनुचित भी है। दूसरे शब्दों में, वह व्यक्ति जिसकी मानहानि हुई है, वह मानहानि करने वाले व्यक्ति पर या तो मुआवजे के लिए मुकदमा कर सकता है, या उस पर इस तरह के कृत्यों के लिए आपराधिक मुकदमा कर सकता है। आम तौर पर मानहानि में किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसके बारे में कुछ गलत प्रकाशन होने की आवश्यकता होती है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि किसी की भावनाओं को चोट पहुंचाने से मानहानि नहीं हो सकती बल्कि किसी झूठे स्टेटमेंट के कारण उसकी प्रतिष्ठा का नुकसान होना चाहिए।







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