कानून अंधा क्यों! आखिर कौन थी ये देवी जिसकी आंखों पर पट्टी और हाथ में है तराजू ?
संपादक शिवाकांत पाठक !
सुप्रीम कोर्ट को भी नहीं है इनके बारे में जानकारी
दरअसल, आरटीआई कार्यकर्ता दानिश खान ने सूचनाधिकार के तहत राष्ट्रपति के सूचना अधिकारी से न्याय की देवी के बारे में जानकारी मांगी थी। लेकिन जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने भी उक्त जानकारी होने से इंकार कर दिया। इसके बाद दानिश ने सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को पत्र लिख कर 'न्याय की प्रतीक देवी' के बारे में जानकारी मांगी।
जवाब में कहा गया कि इंसाफ का तराजू लिए, आंखों पर काली पट्टी बांधे देवी के बारे में कोई लिखित जानकारी उपलब्ध नहीं है। आरटीआई के जवाब में यह भी कहा गया कि संविधान में भी न्याय के इस प्रतीक चिह्न के बारे में कोई जानकारी दर्ज नहीं है। यह बात खुद मुख्य सूचना आयुक्त राधा कृष्ण माथुर ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए दानिश खान को बताई और कहा कि ऐसी किसी तरह की लिखित जानकारी नहीं है।
आप कानून को तो जानते ही होंगे, बचपन से ही हमें इसके बारे बताया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि न्यायालयों में आंखों पर पट्टी बांधे और हाथ में तराजू लिए खडी एक महिला आखिर कौन है जिसे न्याय की देवी कहा जाता है, तो आइए आज हम आपको इसके बारे में बताते हैं.
क्या कहते हैं पुराण?
पौराणिक कथाओं के अनुसार न्याय की देवी की अवधारणा यूनानी देवी डिकी की कहानी पर आधारित है। कलात्मक दृष्टि से डिकी को हाथ में तराजू लिए दर्शाया जाता था। डिकी ज़्यूस की पुत्री थीं और मनुष्यों का न्याय करती थीं। वैदिक संस्कृति में ज्यूस को द्योस: अर्थात् प्रकाश और ज्ञान का देवता अर्थात् बृहस्पति कहा गया है।
उनका रोमन पर्याय थीं जस्टिशिया देवी, जिन्हें आंखों पर पट्टी बाँधे दर्शाया जाता था।
यहां एक बात समझने योग्य है कि तमाम धार्मिक ग्रंथो में स्वर्ग, नरक के बारे में बताया गया है जैसे कि जो लोग अच्छे कार्य करते हैं वे स्वर्ग में या जन्नत में जाते हैं गलत काम करने वाले नरक यानी दोजक में जाते हैं, वे धनवान हो या गरीब सभी के लिए एक जैसी व्यवस्था है मतलब समदर्शिता समान व्यवहार किया जाता है वह नेता हो या फिर सब्जी बेंचने वाला ईश्वर के यहां सबके लिए समान रूप से न्याय होता है , बस आंखो में पट्टी बांधने का यह भी मतलब है कि विधि का विधान पद, ताकत, रुतबा, अमीरी , गरीबी नहीं देखता आंख बंद कर सभी को समान न्याय देता है ! अब आप को इस लेख का सारांश यानि निचोड़ बता रहा हूं गौर करें 👇
(1) धनवान होने के लिए इंसान को मानवता, परोपकारिता , सिद्धांत, आत्मीयता , सत्य का मार्ग छोड़ना पड़ता है !
(2) धनवान को सिर्फ दौलत में ही ईश्वर की अनुभूति होती है वह सोचता है कि धन से अधिक महत्व पूर्ण कुछ भी नहीं है और वो अपार धन कमाने के लिए मानवता के साथ ही राष्ट्र व जनहित तथा रिश्ते सब कुछ भूल जाता है ,,परिणाम आप सभी देख रहे हैं अंत क्या होता है यह भी देखने के बाद अनदेखी कर रहे हैं आप सब 🙏🙏
विशेष = कभी कभी मंदिरों में जाकर देख लिया करें ज्यादा अमीर लोग झुकना पसंद नहीं करते 🙏
और कभी कभी अस्पतालों में भी एक बार जाकर देखा करें बच्चो दिखाए तकी हर गलत काम करने से पहले उनके दिलों में डर रहे 🙏
सारांश= जो ईश्वर, उस परम पिता परमेश्वर, उस मालिक से डरता है वह व्यक्ति कभी भी किसी से नहीं डर सकता 🙏 वह स्वस्थ्य, शांत, व प्रसन्न होकर लंबी आयु को प्राप्त करता है उसके साथ परमात्मा स्वयं रहता है🙏🙏🙏🙏
समाचार, कविता, लेख, गीत, बच्चो में छिपी तमाम प्रतिभाओं डांस, सिंगर, आदी के लिए आप हमसे संपर्क करें हम अपने चैनल, पोर्टल, अखबार के माध्यम से हर पल आपके साथ हैं संपर्क सूत्र=📲 वॉट्स ऐप नम्बर 9897145867, कालिंग 8630065119🖥️🖥️🖥️🖥️🖥️



टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें