सूर्य की तरह आप भी अपने लक्ष के प्रति समर्पित रहें ! शिवाकांत पाठक अध्यक्ष (अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत इकाई हरिद्वार )

 




जैसे उत्तरायण के सूर्य का तेज दिनों-दिन बढता है...वैसे ही आपका तेज-यश व कीर्ति बढ़ती रहे....।।



       


बहुत समय पहले की बात है ,एक  सरोवर में बहुत सारे मेंढक रहतेथे !सरोवर के बीचों-बीच एक बहुत पुराना धातु का खम्भा भी लगा हुआ था जिसे सरोवर को बनवाने वाले राजा ने  लगवाया  था।खम्भा काफी ऊँचा था और उसकी सतह भी चिकनी थी।

एक दिन मेंढकों के दिमाग में  आया कि क्यों ना एक रेस करवाई जाए, भाग  लेने  वाली  प्रतियोगीयों को खम्भे पर चढ़ना होगा,और जो पहले ऊपर पहुच  जाएगा वही विजेता माना  जाएगा ।



रेस के दिन चारो तरफ बहुत भीड़ थी आसपास के इलाकों  से भी कई मेंढक हिस्सा लेने पहुचे माहौल में  सरगर्मी थी   , हर  तरफ शोर ही शोर  था ।

रेस  शुरू  हुई *लेकिन खम्भे को देखकर भीड़ में एकत्र हुए किसी भी मेंढक को ये यकीन नहीं हुआ कि कोई भी मेंढक ऊपर तक  पहुंच पायेगा …

हर  तरफ  यही सुनाई  देता …

“ ये बहुत कठिन है ”

“ वो कभी भी ये  रेस पूरी नहीं  कर पायंगे ”

“ सफलता का  तो  कोई  सवाल ही नहीं इतने चिकने खम्भे पर चढ़ा ही नहीं जा सकता ”और यही हो रहा था , जो भी मेंढक कोशिश करता , वो थोडा ऊपर जाकर नीचे गिर  जाता ,कई मेंढक दो तीन  बार  गिरने के बावजूद अपने प्रयास  में लगे हुए थे …

पर भीड़ तो चिल्लाये जा रही थी  “ये नहीं हो सकता असंभव ”, और वो उत्साहित मेंढक भी ये सुन-सुनकर हताश हो गए और अपना  प्रयास  छोड़  दिया लेकिन उन्ही मेंढकों के बीच  एक छोटा सा मेंढक था जो बार  बार गिरने पर भी उसी जोश के  साथ ऊपर चढ़ने में लगा हुआ था वो लगातार ऊपर की ओर  बढ़ता रहा,और अंततः वह खम्भे के ऊपर पहुच गया और इस रेस का  विजेता बना ।

उसकी जीत पर सभी को बड़ा  आश्चर्य हुआ सभी मेंढक उसे  घेर कर खड़े हो गए और पूछने  लगे कि तुमने ये असंभव काम  कैसे कर दिखाया भला तुम्हे   अपना लक्ष्य प्राप्त करने की  शक्ति कहाँ से मिली,हमें भी तो बताओ कि तुमने ये विजय कैसे प्राप्त की।

तभी पीछे से एक आवाज़ आई “अरे उससे क्या पूछते हो वो तो   बहरा है 

अक्सर हमारे अंदर अपना लक्ष्य प्राप्त करने की काबीलियत होती है, पर हम अपने चारों तरफ मौजूद नकारात्मकता की वजह से खुद को कम आंक बैठते हैं और हमने जो बड़े-बड़े सपने देखे होते हैं उन्हें पूरा किये बिना ही अपनी ज़िन्दगी गुजार देते हैं  आवश्यकता है की हम कमजोर बनाने वाली आवाज के प्रति बहरे हो जाएं तभी हमें सफलता के प्राप्त होगी।

विज्ञापन




टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कैसे बचेगी बेटियां,? नवोदय नगर में दिन दहाड़े प्रेमी ने गला रेत कर कर दी हत्या,! हरिद्वार,!

फुटबॉल ग्राउंड फेज 1 जगजीतपुर कनखल थाना क्षेत्र में घर में घुसकर बदमाशों द्वारा की गई मारपीट,,,!हरिद्वार,!

शाबास सिडकुल पुलिस,,नवोदय नगर की घटना पर एक्टिव पुलिस ने चंद घंटों में दबोचा कातिल,!