पत्रकारों का दिल ना दुखाओ साहब वरना नारद के श्राप से भगवान भी नहीं बच सके।

 


स.संपादक शिवाकांत पाठक।


आदि काल से पत्रिकारिता की शुरूआत ब्रम्ह ऋषि नारद द्वारा कि गई,, बिना किसी वाहन के पदयात्रा कर तीनों लोको में खबरों का आदान प्रदान ब्रम्हा जी मानस पुत्र नारद किया करतें थे,, एक दिन माया नगरी में अचानक एक राजकुमारी के स्वयंवर में शामिल होने हेतु नारद को सुंदर रुप की आवश्यकता प्रतीत हुइ और उन्होने भगवान विष्णु से जाकर कुछ समय के उनका अपना रुप मांगा तो क्यों भगवान विष्णु के नारद परम भक्त थे लेकिन भगवान ने उन्हें बंदर का रुप दे दिया,, और स्वयंवर में नारद के रुप को देख राजकुमारी पास भी नहीं आईं,, बल्कि भगवान विष्णु खुद राजकुमार बन कर पहुंच गए,, साथ ही राजकुमारी ने जयमाल विष्णु के गले में डाल दी,, बाद में भगवान शिव के गणों ने जो देख कर हंस रहे थे नारद जी से अपना मुंह पानी में देखने को कहा,,, नारद अपना चेहरा बंदर का देख आग बबूला होकर भगवान विष्णु के पास पहुंचे और उन्हें बुरा भला कहा साथ ही श्राप दिया कि तुम एक दिन स्त्री के वियोग में वन वन भटकोगे,, बंदर ही तुम्हारी सहायता करेंगे,,, यह घटना अति श्रेष्ठ धर्म ग्रंथ श्री राम चरित मानस में अंकित है,, इसलिए पत्रकारों का दिल ना दुखे एसा प्रयास करना चाहिए क्यों कि जो सबके लिए जीता है,, उसके साथ बहुत सी शक्तियां अदृश्य रुप में रहती है।।


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