उन्हें टोकना समझाना, डांट देना मगर भूल कर हाँथ मत उठाना,,,




 जिन्हे किताबों से जंग लड़नी थी 


वे अब क़ाम पर जा रहे हैँ,,


 वक्त बनकर वे हमको आइना दिखा रहे हैँ,,


उन्हें टोकना समझाना, डांट देना मगर भूल कर हाँथ मत उठाना,,,


वरना समझ लेना कि उन्हें हाँथ उठाना आप ही सिखा रहें हैँ,,


क्यों वे कमजोर, कामचोर, या असहाय नहीं ताकत का खजाना हैँ,,


वे अपने हौसलों से अपने भाग्य की लकीरें खुद बना रहें हैं,,


ये सिर्फ कविता नहीं है मेरे दोस्त,, यह तो हम केवल समझा रहे हैं,,,

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