तमांचा,,,अपराध जगत को हिला कर रख दिया एस एस पी के थप्पड़ की गूंज ने ! हरिद्वार !

 


( तमसो मा ज्योतिर्गमय 🌞 ,,,,, )




संपादक शिवाकांत पाठक !



श्रष्टि के निर्माण के आरंभ में अपराध के साथ दंड, रात्रि के साथ दिन ,, अंधकार और प्रकाश आदि का समन्वय रखा गया है यहीं प्रकृति का स्वभाव है आप सोचिए कि यदि प्रकाश न हो तो शेष क्या होगा ,,? अंधकार और अंधकार को ही अज्ञान कहा गया है साथ ही अज्ञान से अपराध की उत्पति होती है इस अपराध रूपी अंधकार को समाप्त करने के लिए माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड  पुष्कर सिंह धामी ने अपनी सूझबूझ से परखते हुए धर्मनगरी की अव्यवस्थित दुर्दशा को व्यवस्थित करने हेतु अपने स्वयं के विवेक का  अविस्मरणीय प्रमाण देते हुए आई पी एस अजय सिंह के हाथों में हरिद्वार की कमान सौंपी जो कि बेहद महत्वपूर्ण निर्णय है ,, सम्पूर्ण प्रदेश का मुखिया यदि कोई निर्णय अपनी निर्णायक क्षमता के आधार पर लेता है तो उसमें  ईश्वरीय इक्षा का समावेश होता है  ,, एस एस पी का पद एक सेनापति का पद होता है और सेना पति को हमारी भारतीय संस्कृति एवम् शास्त्रों में भगवान का रूप माना गया है ,, ठीक इसी प्रकार प्रदेश का मुखिया मुख्यमंत्री भी ईश्वर का स्वरूप होता है इसलिए,, हरीद्वार  जिसे धरम नगरी कहते हैं उसकी सुरक्षा की बागडोर संभालने के लिए आई पी एस अजय सिंह को ही क्यों चुना गया  ? आप के मन में यह सवाल जरूर उठ रहा होगा ,, तो सोचिए कि रावण का विनाश करने के लिए प्रभु राम ने अपने सहयोग के लिए हनुमान को ही क्यों चुना ? यदि इस बात का जवाब आपके पास है तो वही सच है ,,



क्यों कि जब अपना दायां हाथ उठाकर हनुमान जी ने रावण से कहा- ‘राक्षसराज देख, पांच अंगुलियों वाला यह मेरा हाथ, तेरे शरीर में चिरकाल से जो जीवात्मा निवास करता है, उसे आज यह इस देह से अलग कर देगा’ यह सुनकर रावण की आंखें लाल हो गईं और उसने कहा- ‘तुच्‍छ वानर..तू निशंक होकर अभी मुझ पर प्रहार कर..देखता हूं तुझमें कितना पराक्रम है, यह जानकर ही मैं तेरा नाश करुंगा’



फिर हनुमान जी बोले- ‘तूने मेरे पराक्रम को पहले भी देखा होगा..किस तरह लंका-दहन हुआ, किस तरह मैंने पहले ही तेरे पुत्र अक्षय का वध किया था, याद तो कर.’ यह सुनते ही रावण ने हनुमान जी को तमाचा मारा.


हनुमान जी 2 घड़ी रुके और फिर उन्होंने भी रावण को तमाचा जड़ दिया. जिससे रावण उसी तरह कांप उठा, जैसे भूकम्प आने पर पर्वत हिलने लगता है. रावण को थप्पड़ खाते देख आकाश से ऋषि, वानर, सिद्ध, देवता और असुर सभी हर्षध्वनि करने लगे. इस प्रकार हनुमान जी और रावण में थप्‍पड़ों से लड़ाई हुई. फिर मौका पाकर रावण वहां से हट गया!  


बस इसी प्रकार का तमाचा हरीद्वार धरम नगरी में व्याप्त अपराध जगत पर एस एस पी अजय सिंह के के कुशल नेतृत्व के रूप में पड़ा है जिसके प्रमाण आप देख रहे हैं बच्चा चोरी की घटना हो या फिर इनामी  बदमाशों की धर पकड़ का काम नशे के तस्कर हों या अपने परिजनों से बिछुड़े लोग बस पलक झपकते ही हरिद्वार पुलिस वह कर दिखाती हैं जिसकी कल्पना आप नहीं कर सकते तो यहां सोचने वाली बात तो यह है कि यह सब कुछ परिवर्तन का सामर्थ्य सेना पति के अलावा दूसरा कौन रख सकता है आज अपराधियो का इतना बुरा हाल है कि खुद न्यायालय में जाकर समर्पण करने के लिए विवश हैं ,,,,


आपको याद दिला दूं कि वी एस इन्डिया न्यूज चैनल एवम् विचार सूचक समाचार पत्र परिवार किसी का विरोध या पक्षधर नहीं है केवल सच के साथ है और रहेगा  कुछ अपराधी वर्ग के लोग आज भी अपराधिक गतिविधियों में लिप्त हैं जो कि धरम नगरी की मर्यादा के लिए प्रश्न चिन्ह साबित हो रहे हैं जिनका खुलासा शीघ्र ही किया जाएगा🙏


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