पितृ भक्ति का सच्चा उदाहरण बने मनीष अग्रवाल! ज्वालापुर हरिद्वार! रिपोर्ट मुकेश राणा!

 


स. संपादक शिवाकांत पाठक!


अग्रवाल ट्रेडर्स के मालिक श्री मनीष अग्रवाल जी  पीठ बाजार ज्वालापुर के प्रतिष्टित व्यापारी है

एक बहुत ही नेक दिल इंसान है हर समय गरीबों की सेवा में तत्पर रहते हैं इन्होंने अपने दादा जी और पिता जी के सपनों को साकार करने के लिए एयरफोर्स की लगी हुई नॉकरी छोड़ दिया क्यों कि गो स्वामी तुलसी दास जी महराज ने राम चरित मानस में लिखा है,,


 मात पिता अरु गुरु की बानी, बिनहि विचार किए शुभ जानी !! अर्थात माता पिता और गुरु के आदेश में विचार के लिए स्थान नहीं है


अयोध्या के राजसिंहासन के सर्वथा सुयोग्य उत्तराधिकारी थे भगवान श्रीराम। सम्राट के ज्येष्ठ पुत्र होने के नाते यह उनका अधिकार भी बनता था मगर पिता की आज्ञा उनके लिए सारे राजसी सुखों से कहीं बढ़कर थी। अतः उनकी आज्ञा जानते ही राम बिना किसी प्रश्न के, बिना किसी ग्लानि या त्याग जताने के अहंकार के, वन की ओर जाने को तत्पर हो उठे।


स्वयं दशरथ के मन में श्रीराम के प्रति असीम स्नेह था, मगर वे वचन से बंधे थे। एक ओर पुत्र प्रेम था, तो दूसरी ओर कैकयी को दिया वचन पूरा करने का कर्तव्य। इस द्वंद्व में जीत कर्तव्य की हुई और दशरथ ने भरे मन से राम को वनवास का आदेश सुना दिया।


राम ने तो पिता की आज्ञा का पालन करते हुए निःसंकोच वन का रुख कर लिया किंतु दशरथ का पितृ हृदय पुत्र का वियोग और उसके साथ हुए अन्याय की टीस सह न सका। अंततः राम का नाम लेते हुए ही वे संसार को त्याग गए।



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